गुवाहाटी : राज्य सरकार गुवाहाटी के पहाड़ों और जलाशयों को खाली कराने के बीच गुवाहाटी के 13 पहाड़ों के कब्जाधारियों को भूमि का मालिकाना हक देने की तैयारी में है। सरकार ने घोषणा की कि तीन पीढिय़ों या 75 साल से जमीन पर काबिज पहाड़ी परिवारों को जमीन का पट्टा मिलेगा। कामरूप मेट्रोपोलिटन जिला वन अधिकार समिति के अध्यक्ष एवं जिला आयुक्त ने असम सरकार के वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत पहाड़ों  पर  रहने वाली अनुसूचित जनजातियां और अन्य पारंपरिक वन निवासी अर्थात सामान्य परिवारों को भूमि स्वामित्व के लिए 31 दिसंबर तक आवेदन करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। 

राज्य सरकार ने वन अधिकार अधिनियम के तहत क्रमश: फटाशिल रिजर्व फॉरेस्ट, दक्षिण कालापहाड़ रिजर्व फॉरेस्ट, हेंगराबाड़ी रिजर्व फॉरेस्ट, शरणिया रिजर्व फॉरेस्ट, गोटानगर रिजर्व फॉरेस्ट, जालुकबाड़ी रिजर्व फॉरेस्ट, गढ़भांगा रिजर्व फॉरेस्ट और रानी रिजर्व फॉरेस्ट तथा सोनापुर वन कार्यालय के अधीन मराकदला रिजर्व फॉरेस्ट,ओप्रीकोला वेस्ट रिजर्व फॉरेस्ट, चमता रिजर्व फॉरेस्ट, तेतेलीगुड़ी रिजर्व फॉरेस्ट और मातापहाड़ रिजर्व फॉरेस्ट  के  कब्जाधारियों को भूमि पट्टा जारी करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि वन अधिकार अधिनियम के तहत पहाड़ों में रहने वाले सामान्य लोग और अन्य पारंपरिक वनवासी लोगों को 13 दिसंबर 2006 के बाद 3 पीढिय़ां या 75 साल के निवास प्रमाण पत्र एवं गवाही पर ही भूमि का पट्टा प्राप्त होगा, जो लोग 13 दिसंबर 2005 से पहले ही निवास कर रहे थे उन्हें किसी भी साक्ष्य या गवाही पर भूमि प्राप्त होगी।

गौरतलब है कि पहले जिला वन अधिकार समिति ने वन अधिकार अधिनियम के तहत भूमि पट्टों के लिए आवेदन की तिथि 31 अक्तूबर तय की थी, लेकिन इस बार आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गयी है। वन अधिकार समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि पट्टे के लिए आवेदकों को आवेदन के साथ वन अधिकार अधिनियम 2006 के अधिनियम 13 में उल्लेखित साक्ष्य के कम से कम दो प्रमाण पत्र संलग्न करना आवश्यक है। दावों को संबंधित क्षेत्र की गांव पंचायत द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए। आवेदन के साथ कब्जे वाली भूमि का नक्शा भी संलग्न करना आवश्यक है।