देवी देवताओं की विधि-विधान से पूजा व आरती के बाद उन्हें भोग लगाया जाता है। देवी देवता अपने प्रिय भोग से अति प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर कृपा बनाए रखते हैं। पूजा में भोग का बहुत महत्व है। भगवान शंकर को पंचामृत और भंग का भोग प्रिय है तो भगवान कृष्ण माखन मिश्री से प्रसन्न होते हैं। आइए जानते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किस देवी देवता को किसका भोग लगाना सबसे उत्तम माना जाता है।

भगवान विष्णु : भगवान विष्णु को खीर, हलवा का नैवेद्य अत्यंत प्रिय है। उन्हें चावल या सूजी की खीर या सूजी के हलवे का भोग लगाना चाहिए। रविवार और गुरुवार को मंदिर जाकर भगवान भगवान के दर्शन के बाद खीर या सूजी के हलवे का भोग लगाने से कृपा बनी रहती है और सुख समृद्धि में वृद्धि होती है।

भगवान शिव : भगवान शंकर को पंचामृत और भंग अत्यंत प्रिय हैं। उन्हें दूध, दही, शहद, और घी का अभिषेक कराकर भांग-धतूरा, गंध, चंदन, फूल, रोली, वस्त्र अर्पित करने के बाद रेवड़ी, चिरौंजी और मिश्री चढ़ाया जाता है।

भगवान गणेश : भगवान गणेश को मोदक और लड्डू सबसे ज्यादा प्रिय है। उन्हें तरह-तरह के मोदक और लड्डू का भोग लगाना चाहिए। हर माह की चतुर्थी को भगवान गणेश को मोदक और लड्डू का भाग लगाने से जीवन की हर बाधा दूर हो जा जाती है। भगवान कृृष्ण : भगवान कृष्ण को माखन और मिश्री अत्यंत प्रिय हैं। उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाना चाहिए। इसके साथ ही धनिया की पंजीरी, मखाने की खीर और पंचामृत के भोग से भी भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं। देवी दुर्गा : माता दुर्गा को नारियल, केला जैसे फल और मालपुआ, खीर या हलवा जैसे व्यंजनों का भोग लगाना चाहिए। बुधवार और शुक्रवार के दिन दुर्गा माता को भोग लगाने से  हर तरह के संकट दूर हो जाते हैं। 

देवी लक्ष्मी : धन की देवी माता लक्ष्मी को सफेद व पीले रंग की मीठी चीजें प्रिय हैं। उन्हें सफेद और पीले रंग की मिठाइयों से भोग लगाना सबसे उत्तम होता है। शुक्रवार को लाल फूल अर्पित कर भोग लगाने से जीवन में शांति और समृद्धि आती है।