प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार कहते हैं कि भारत में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बावजूद इसके राज्य सरकारें अपने यहां पर्यटन का विकास नहीं कर रही हैं और कुछ राज्य करते भी हैं तो वे खानापूर्ति के सिवाय और कुछ नहीं होता है। वास्तव में देखा जाए तो केरल और मेघालय को छोड़कर अन्य राज्यों में पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए ऐतिहासिक स्थानों, मठ मंदिरों, अन्य पर्यटक स्थलों का उस तरह से विकास नहीं किया जाता,जो देशी या विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में सफल हो सकें। असम में कई पर्यटन स्थल हैं, उनमें कामाख्या मंदिर और ऐतिहासिक नवग्रह मंदिर भी शामिल है। कामाख्या मंदिर में भारी संख्या में देश-विदेश से लोग जुटते हैं, परंतु नवग्रह मंदिर का प्रचार- प्रसार इतना कम है कि उसके बारे में सही ढंग से गुवाहाटी के लोग भी नहीं जानते हैं। असम में पर्यटन के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं, परंतु राज्य सरकार की उपेक्षा के कारण इनका सही ढंग से पर्यटन के लिए उपयोग नहीं हो पा रहा है, जो रोजगार उत्पन्न करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। ऐसे में हमें कुछ देशों से सीखने की जरूरत है, जो पर्यटन स्थलों का उपयोग कर अपने देश के लिए बड़ी संख्या में रोजगार उत्पन्न करते हैं।
खबर है कि भारतीय पर्यटकों को आकॢषत करने के लिए श्रीलंका, थाईलैंड और मलेशिया ने भारतीयों के लिए वीजा की आवश्यकता समाप्त कर दी है। ऐसी खबरें हैं कि वियतनाम भी ऐसी ही नीति शुरू करने पर विचार कर रहा है। थाईलैंड अपने पूर्वी आर्थिक गलियारे में भारतीय नागरिकों के लिए 10 वर्ष की अवधि का निवेशक वीजा शुरू कर सकता है। इन देशों के निर्णयों से लगता है कि वे भारतीय पर्यटकों को अधिक महत्व दे रहे हैं। भारतीय सैलानी कोविड महामारी के बाद आर्थिक सुधार में इन देशों के पर्यटन क्षेत्र की मदद कर रहे हैं। यात्रा वीजा मुक्त किए जाने से कई तरह की झंझट समाप्त हो जाएंगी और इसका परिणाम यह होगा कि पर्यटकों की आमद बढ़ जाएगी। चीन से आने वाले पर्यटकों की संख्या कम होने के बाद दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों ने भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। श्रीलंका सरकार का इस संबंध में उठाया गया कदम आवश्यकता से अधिक जुड़ा हुआ है। वहां की सरकार ऋ ण के बोझ से कराह रही अर्थव्यवस्था को उबारना चाहती है। ऑस्ट्रेलिया और रूस ने भी वीजा संबंधित प्रक्रियाएं सरल बना दी हैं। इन देशों ने अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ई-वीजा की शुरुआत की है। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है और भारतीयों में विदेश यात्रा की ललक भी बढ़ती जा रही है। भारत से बड़ी संख्या में लोग घूमने या अन्य कार्यों के लिए विदेश जा रहे हैं।
अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत विदेश यात्रा पर खर्च करने वाला चौथा सबसे बड़ा देश बन जाएगा। भारत के लोगों में विदेश यात्रा के प्रति अति उत्साह के कई कारण हो सकते हैं। कोविड महामारी के बाद वैश्विक स्तर पर सीमाएं खुलने के बाद लोग विदेश यात्रा करने की अपनी इच्छा जमकर भुना रहे हैं। यह सबसे महत्वपूर्ण कारण माना जा सकता है। भारत में आबादी का स्वरूप भी एक बड़ा कारण रहा है। युवा लोगों में विदेश यात्रा करने की ललक अधिक बढ़ रही है। कुछ खंडों में भारतीय उपभोक्ता बाजार का बढ़ता आकार संकेत दे रहा है कि ऐसे भारतीय परिवारों की संख्या बढ़ी है जो घूमने-फिरने एवं मनोरंजन पर अधिक खर्च करने की क्षमता रखने लगे हैं। वर्ष 2019 में यात्रा एवं पर्यटन पर लगभग 15 करोड़ डॉलर खर्च हुए थे और अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर 410 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। भारतीयों ने वर्ष 2022-23 के दौरान व्यक्तिगत यात्राओं पर 21 अरब डॉलर खर्च किए। यह आंकड़ा वर्ष 2021-22 की तुलना में 90 प्रतिशत अधिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम की नवीनतम कड़ी में देश के नागरिकों से विदेश में विवाह समारोह आयोजित करने से बचने का आग्रह किया है। सरकार ने हाल में एक अभियान की शुरुआत की जिसमें भारत को विवाह समारोह आयोजित करने के विशिष्ट स्थान के रूप में दिखाया गया है। पर्यटन उद्योग में श्रम की अधिक आवश्यकता पड़ती है, इसलिए इसमें बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होने की अपार संभावनाएं हैं।