पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के समाचार के साथ बुधवार को गुवाहाटी के श्रीमंत शंकरदेव अंतर्राष्ट्रीय सभागार में असम सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने आनंदराम बरुवा पुरस्कार 2023 प्रदान किए और पीएमश्री योजना का उद्घाटन किया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि असम सरकार ने छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ाने और आईटी शिक्षा के माध्यम से उनके दिमाग को आधुनिक ज्ञान से समृद्ध करने के लिए आनंदराम बरुवा पुरस्कार शुरू किया है। इस योजना का नाम पंडित आनंदराम बरुवा के नाम पर रखा गया है ताकि राज्य की उभरती पीढ़ी इस महान असमिया व्यक्ति के उदाहरण का अनुसरण कर सके और शिक्षा के क्षेत्र में सफलतापूर्वक आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि 2005 में योजना शुरू होने के बाद से पिछले साल तक 4,13,400 छात्र इस योजना से लाभान्वित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि यह योजना यह सुनिश्चित करने के लिए कार्यान्वित की जा रही है कि जिन छात्रों ने सेबा के तहत हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट परीक्षा 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंकों के साथ उत्तीर्ण की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष पुरस्कार विजेताओं को प्रमाण पत्र के साथ लैपटॉप या कंप्यूटर खरीदने के लिए 15,000 रुपए दिए गए हैं। राज्य के 27,183 मेधावी विद्यार्थियों के बैंक खातों में धनराशि भेज दी गई है। मुख्यमंत्री ने आनंदराम बरुवा पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रत्येक छात्र को बधाई दी और कामना की कि वे दिवंगत पंडित की तरह ज्ञान की रोशनी से जगमगाएं। आज शुरू की गई पीएमश्री योजना के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने शैक्षिक क्षेत्र को और अधिक प्रेरक बनाने के उद्देश्य से पीएमश्री या प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया योजना शुरू की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक छात्र को उचित देखभाल और सीखने का एक अलग अनुभव मिले।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत, भारत सरकार ने 2026-27 तक 27,360 करोड़ रुपए की परियोजना लागत पर देश भर में 14,500 से अधिक स्कूल बनाने के लिए कदम उठाए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज असम में शुभारंभ किए गए इस योजना के प्रथम चरण में 264 स्कूलों को लिए जाएंगे और वर्ष 2023-24 के लिए 127.46 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत चयनित विद्यालय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सभी तत्वों का प्रदर्शन कर स्वयं को मॉडल विद्यालय के रूप में विकसित करेंगे तथा अन्य पड़ोसी विद्यालयों को भी शिक्षा प्रदान करेंगे। इस योजना के तहत स्कूलों को पर्यावरण के अनुकूल पहलुओं को शामिल करके हरित स्कूलों के रूप में विकसित किया जाएगा उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षा को अधिक अनुभवात्मक, समग्र, एकीकृत, ज्ञान-उन्मुख, नवीन, शिक्षार्थी-केंद्रित, चर्चा-आधारित, लचीला और मनोरंजक बनाया जाएगा।