व्यापार में सबसे अहम चीज मुनाफा है और मुनाफे के लिए व्यापार किया जाता है। इसी कड़ी में कभी-कभार व्यापारिक झगड़े  आमतौर पर देखे जाते हैं। ये झगड़े लघु व्यवसायी से लेकर दो राष्ट्रों के बीच भी देखे जाते हैं। मामला लाभ- हानि से जुड़ा होता है, इसलिए इस झगड़े में स्थायित्व की कमी होती है और मामला कभी भी सुलझ जाता है और सुलह के साथ व्यापारिक गतिविधियां फिर से शुरू हो जाती हैं। कभी व्यापारिक हितों को ध्यान में रखकर भारत का यूरोपीय संघ  (ईयू) के साथ झगड़ा हो गया, जिससे दोनों ओर व्यापारिक नुकसान  का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए दोनों झगड़े को सुलझाकर व्यापार करने की तैयारी में हैं। जानकार बताते हैं कि भारत और ईयू के बीच व्यापारिक  झगड़ा जल्द ही समाप्त होने वाला है। इस पर भारत और ईयू के बीच बने उच्चस्तरीय ट्रेड एंड टेक काउंसिल (टीटीसी) में एक बैठक हुई थी जहां समाधान पर चर्चा हुई थी। झगड़ा इन्फॉर्मेशन कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजी (आईसीटी)उत्पादों को लेकर है। आशंका थी कि इसका असर देश के अंदर इलेक्ट्रॉनिक सामान के उत्पादन को बढ़ावा देने की भारत की कोशिशों पर पड़ सकता था। झगड़ा 2019 में शुरू हुआ था जब ईयू ने डब्ल्यूटीओ में भारत के खिलाफ शिकायत की।

भारत ने मोबाइल फोन, उसके पुर्जों, बेस स्टेशनों, इंटीग्रेटेड सर्किट और ऑप्टिकल उपकरण जैसे आईसीटी उत्पादों पर आयात शुल्क लगा रखा था और ईयू ने इस शुल्क में चुनौती दी थी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लायन 2022 में अपने भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले थे। ईयू का दावा था कि शुल्क वैश्विक मानकों के हिसाब से नहीं है और भारत भेजे जाने वाले उसके 54 अरब रुपयों के मूल्य के टेक निर्यात को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ईयू ने डब्ल्यूटीओ की विवाद समाधान प्रणाली के तहत इस शुल्क को चुनौती दे दी। भारत ने आईसीटी सामान पर ज्यादा शुल्क इसलिए लगाया था ताकि इससे देश के अंदर इलेक्ट्रॉनिक सामान के उत्पादन को बढ़ावा मिले। बाद में इसके लिए भारत सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना भी शुरू की, इसके अलावा भारत ने ईयू को बताया कि भारतीय स्टील के आयात पर संघ ने कुछ  प्रतिबंध लगा रखे हैं जिसकी वजह से भारत को भी इसी तरह का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ईयू ने स्टील के आयात की सीमा तय कर दी थी जिसके पार जाने पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जा रहा था।

डब्ल्यूटीओ ने अप्रैल, 2023 में ईयू के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि भारत के शुल्क बहुपक्षीय व्यापार के नियमों के तहत भारत की प्रतिबद्धता का उल्लंघन करते हैं। इसके बाद भारत ने इस आदेश की वैधता पर ही सवाल उठा दिया था। फिर दोनों पक्षों ने आपस में बातचीत कर झगड़ा का समाधान करने के लिए डब्ल्यूटीओ से समय मांगा था। पहले सितंबर 19 तक का समय दिया गया और उसके बाद तीन महीने और दिए गए। अब मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि दोनों पक्ष इस मामले में एक आपसी समझौते की तरफ बढ़ रहे हैं। इस संभावित समाधान का श्रेय टीटीसी को दिया जा रहा है। भारत से पहले ईयू का सिर्फ  अमरीका के साथ टीटीसी था। इस तरह की प्रक्रियाओं के जरिए ईयू चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपने जैसे विचारों वाले देशों के साथ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझेदारी करना चाह रहा है।

संघ पहले से ही भारत का दूसरा सबसे बड़ाा व्यापारिक पार्टनर है। भारत डब्ल्यूटीओ में धीरे-धीरे अपने सभी लंबित विवादों को निपटाने की तरफ बढ़ रहा है। हाल ही में उसने अमरीका के साथ अपने सातों लंबित विवादों का भी समाधान कर लिया। हालांकि ईयू वाले झगड़े की ही तरह भरत के जापान और ताइवान के साथ झगड़े अभी भी चल रहे हैं। दुनिया में कुछ ही देश हैं जिनका एक्सपोर्ट कीमत के लिहाज से कुल इंपोर्ट से ज्यादा है। यूक्रेन युद्ध के बाद सूची में काफी उथल-पुथल हुई है। कुल मिलाकर इस झगड़े को समाप्त होने में हम दोनों की भलाई है। साथ ही झगड़े को खत्म हो जाने से ट्रेड को बढ़ावा मिलेगा, जो हमारी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी बात है।