दुनिया भर में विशेषज्ञ चीनी को मीठा जहर कहते हैं। ये नाम यूं ही नहीं दिया गया है। जरूरत से ज्यादा चीनी कई जानलेवा कंडीशंस जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन और ओबेसिटी की जड़ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, डायबिटीज, हाइपरटेंशन और ओबेसिटी जैसी ये नॉन कम्युनिकेबल डिजीज दुनिया में 71 प्रतिशत मौतों की जिम्मेदार हैं। दुनिया भर में लोग इस मीठे जहर को माशूका बनाए हुए हैं और खुद को जानलेवा बीमारियों के मुंह में धकेल रहे हैं। औसतन एक भारतीय साल भर में 20 किलो चीनी खाता है। वहीं, औसतन एक अमरीकी साल भर में 45 किलो चीनी खपा देता है। रोजमर्रा के खानपान में चीनी के अलावा कोल्ड ड्रिंक्स, कुकीज, बिस्कुट और ब्रेड जैसी चीजों में भी शुगर रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दिन में 50 ग्राम से ज्यादा चीनी सेहत के लिए ठीक नहीं है। अगर आपका शरीर नीचे बताए संकेत दे रहा है तो समझ जाइए आप जरूरत से ज्यादा चीनी खा रहे हैं-
1. मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द : आर्थराइटिस फाउंडेशन के मुताबिक, डायबिटीज के लगभग आधे मरीजों को आर्थराइटिस यानी जोड़ों में दर्द की भी समस्या होती है। डॉ. नवनीत बताते हैं कि ज्यादा शुगर मांसपेशियों और हाड्डियों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। अगर किसी को कम उम्र में ही शरीर में दर्द रहता है, तो ये डाइट में ज्यादा शुगर होने की तरफ एक इशारा हो सकता है।
2. समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण : हमारा शरीर सिर्फ चीनी यानी सुक्रोज पर चलने के लिए नहीं बना है। हमें ऊर्जा के लिए ग्लूकोज की जरूरत होती है। अक्सर हम इन दोनों को एक समझ लेते हैं। लेकिन इनमें अंतर है। सुक्रोज यानी चीनी ग्लूकोज और फ्रक्टोज दो तरह की शुगर से मिलकर बनता है। ग्लूकोज पचाने में तो हमारे शरीर को कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन सुक्रोज पचाने के लिए लिवर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यहां तक कि ज्यादा सुक्रोज ली जाए तो ये फैटी लिवर का भी कारण बन सकता है।
3. डल टेस्ट बड्स : जब हम चीनी खाते हैं तो हमारे दिमाग से डोपामाइन नाम का एक हॉर्मोन निकलता है। जो हमें खुशी का एहसास देता है। सिगरेट के कश लेने पर भी यही हॉर्मोन रिलीज होता है। यही कारण है कि स्मोकिंग से लोगों को आनंद का अनुभव होता है। और बार-बार इसी आनंद को पाने की लत लग जाती है। ठीक इसी तरह चीनी से स्वाद के साथ आपको आनंद तो मिलता है, लेकिन ये आनंद ज्यादा देर नहीं रहता। कुछ समय बाद फिर मीठा खाने की इच्छा होती है। इसलिए बार-बार मीठे की क्रेविंग भी एक संकेत हो सकती है कि आप जरूरत से ज्यादा मीठा खा रहे हैं।
4. दांतों में कैविटी : करीब 100 साल पहले कैनेडियन डेंटिस्ट वेस्टन प्राइस ने एक किताब लिखी, जिसका नाम था 'न्यूट्रिशन एंड फिजिकल डीकेÓ। किताब में वे कुछ ऐसी सभ्यताओं के बारे में बताते हैं जिनमें बिना किसी टूथब्रश और मॉडर्न डेंटल केयर के दांत एकदम दुरुस्त थे। इसका कारण उन लोगों की लो शुगर डाइट थी। मतलब हम समझ सकते हैं कि बिना चीनी की डाइट से लोगों के दांत सालों साल सुरक्षित रहते हैं।