हर माह में दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार प्रदोष व्रत 24 नवंबर दिन शुक्रवार को रखा जा रहा है। शुक्रवार को पडऩे वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में प्रदोष व्रत को खास महत्व दिया गया है। इस दिन शिव जी के भक्त व्रत रखते हैं और प्रदोष काल में शिव शंकर और माता पार्वती की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही व्यक्ति के जीवन में खुशियां आती हैं।  कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 24 नवंबर दिन शुक्रवार को शाम 7 बजकर 06 मिनट पर हो रही है। अगले दिन 25 नवंबर दिन शनिवार को शाम 5 बजकर 22 मिनट पर इसका समापन होगा। प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय की जाती है इसलिए नवंबर का अंतिम प्रदोष व्रत 24 नवंबर को ही रखा जाएगा।

प्रदोष व्रत पूजा विधि : शुक्र प्रदोष व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान आदि करें।  इसके बाद भगवान भोलेनाथ के सामने दीपक प्रज्ज्वलित कर प्रदोष व्रत का संकल्प लें। संध्या समय शुभ मुहूर्त में पूजा आरंभ करें। गाय के दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें।  फिर शिवलिंग पर श्वेत चंदन लगाकर बेलपत्र, मदार, पुष्प, भांग, आदि अर्पित करें।  फिर विधिपूर्वक पूजन करें और आरती उतारें। 

प्रदोष व्रत का महत्व : प्रदोष व्रत वाले दिन शाम के समय यानी प्रदोष काल में शिव जी की पूजा की जाती है। इस दौरान की गई सभी प्रकार प्रार्थनाएं और पूजा सफल मानी जाती हैं। शुक्र प्रदोष व्रत को शास्त्रों में शुभ फलदायी माना गया है। इस व्रत को करने से रोग, ग्रह दोष, कष्ट, पाप आदि से मुक्ति मिलती है। साथ ही नि:संतान लोगों को संतान की भी प्राप्ति होती है।