गुजरात के अहमदाबाद स्थित नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में खेले गए विश्वकप क्रिकेट के फाइनल मैच में आस्ट्रेलिया ने भारत को छह विकेट से शिकस्त देकर चैंपियन बनने के सपने को चकनाचूर कर दिया। भारत लगातार दस मैच जीतकर चैंपियन बनने का प्रबल दावेदार था। लेकिन आस्ट्रेलिया ने भारत को पराजित कर छठी बार क्रिकेट का बादशाह बन गया। भारत की हार से भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों का दिल टूटना स्वाभाविक है। सभी क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना था कि इस बार की भारतीय टीम बैटिगं, बॉलिंग और फील्डिंग तीनों ही विभागों में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है। भारत की कमजोर कड़ी बॉलिंग भी इस बार खतरनाक दिख रही थी। फाइनल में आस्ट्रेलिया ने भारत को हर क्षेत्र में मात दी है।
भारतीय कप्तान रोहित शर्मा का आउट होना मैच का सबसे टर्निंग प्वाइंट था। शुभमन गिल एवं श्रेयस अय्यर भी खराब शॉट मारकर 4-4 रन पर आउट हो गए। विराट कोहली एवं केएल राहुल ने पारी को संभालने का प्रयास किया। दोनों बल्लेबाजों ने क्रमश: 54 एवं 66 रन बनाए। लेकिन ये दोनों बल्लेबाज हेड एवं मैक्सवेल जैसे गेंदबाज पर दबदबा बनाने एवं तेजी से रन बनाने में विफल रहे। सूर्य कुमार यादव 18, रवीन्द्र जडेजा 9 एवं मोहम्मद शमी 6 रन बनाकर आउट हुए। सूर्य कुमार यादव से पहले रवीन्द्र जडेजा को बैटिंग के लिए लाना सही फैसला साबित नहीं हुआ। आस्ट्रेलिया ने अपने गेम प्लान के तहत भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। फाइनल में भारत की गेंदबाजी भी पूरी तरह रंग में नहीं दिखी।
शुरुआती ओवर के लिए मोहम्मद सिराज की जगह मोहम्मद शमी को लाने से टीम को कोई फायदा नहीं हुआ। शुरुआती दबाव बनाने के बावजूद भारतीय गेंदबाज ट्रेविस हेड एवं लाबुशेन को रोकने में असफल रहे। इसी जोड़ी ने आस्ट्रेलिया को जीत के कगार तक पहुंचा दिया। आस्ट्रेलिया ने 43वें ओवर में ही भारत द्वारा निर्धारित 241 रनों का लक्ष्य हासिल कर लिया। फाइनल की हार के लिए फील्डिंग को भी जिम्मेवार माना जा रहा है। आस्ट्रेलियाई खिलाडिय़ों ने अपनी फील्डिंग के बल पर कई चौके बचाए जो आस्ट्रेलिया के लिए अंत में ट्रंप कार्ड साबित हुआ।
फाइनल मैच में अंपायङ्क्षरग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दो मौके ऐसे आए जब अंपायङ्क्षरग पर ही उंगली उठी है। अगर विश्वकप क्रिकेट के फाइनल जैसे मैच में स्तरहीन अंपायरिंग होगी तो मैच का परिणाम अजीबोगरीब हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मैच के दौरान स्टेडियम में उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने ड्रेसिंग रूम में पहुंच कर खिलाडिय़ों को ढांढ़स बंधाया एवं हौसला अफजाई की। भारत के पास वर्ष 2011 के बाद फाइनल जीतने का बेहतरीन मौका था जिसे भारत ने गंवा दिया। आस्ट्रेलिया ने दो शुरुआती मैच हारने के बाद जुझारूपन दिखाया जिसका परिणाम सबके सामने है। अब टीम इंडिया को चिंतन कर भविष्य में आगे बढ़ने की जरुरत है।