गुवाहाटी : कार्तिक मास की शुक्ल षष्ठी तिथि के मौके पर राज्यभर के छठ घाटों पर व्रतधारियों, श्रद्धालओं और भक्तों  का हुजूम दिखा। सदिया से लेकर धुबड़ी तक के ब्रह्मपुत्र नद स्थित छठ घाटों और तलाब पर भक्तों की भीड़ दिखी। सूर्योपासना  के चार दिवसीय छठ महापर्व के तीसरे दिन रविवार की शाम कई  घंटों के उपवास के बाद व्रती चेहरे पर खुशी व उत्साह के साथ दोपहर से अपने निकटतम छठ घाट पर पहुंचने लगे, वहीं  4 बजते ही सभी  घाट  भर गए, वहीं करीब 4.30 बजे व्रतधारियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर  को  घर में बने ठेकुवा, फल, मिष्ठान, नारियल आदि से  अर्घ्य अर्पित किए। इस माकै पर सभी छठ घाटों पर  आध्यात्म, आस्था, परंपरा व संस्कृृति की अटूट छटा दिखी। हर पद व वर्ग के लोग एक छाट पर एकत्रित होकर एक ही जल की धारा में खड़े होकर सूर्य देवी की आराधना करते दिखे।  कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए......छठ मैया के गीतों तथा बैंड बाजों की धुन तथा वैदिक मंत्रोच्चारण से गूंज उठा।  इसके बाद अपने-अपने घर को लौट आए तथा कुछेक घाट पर ही जमे रहे।

छठ घाटों पर क्रिकेट प्रेमियो में काफी उत्साह दिखा। इस मौके पर शुक्रेश्वर के छठ घाट पर भारतीय खिलाड़ियों के बैनर व पोस्टर से छठ घाट को स्टेडियम तथा पेबेलियन की तर्ज पर सजाया गया था। छठ पूजा के गेट पर क्रिकेट प्रेमियो ने छठ मैया से क्रिकेट में जीत की कामना की, वहीं पोस्टर पर  वर्ल्ड कप जीत के  साथ ही टी- 20  की जीत को दिखाया गया है,वही फैंसी बाजार घाट, लाचित घाट तथा माछखोवा घाट पर भारत तथा ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी का पोस्टर लगा हुआ था।  इसके साथ ही छठ पूजा के गेट को अयोध्या में रामलला के मंदिर के पोस्टर के साथ जयश्री राम लिखा झंडा और तिरंगा लहरा रहा था। इसके साथ ही इसरो की मिसाइल, मोर, हिरण और बाबा गणेश के साथ सूर्य देवता  की आकृति बनी हुई थी, जो  सभी को आकर्षित कर रही था,  वही देर रात को  छठ घाटों पर छठ मैया के  गीतों की प्रस्तुति से  छठ घाट गूंज उठे।  उल्लेखनीय है कि देर रात से ही व्रतधारी व श्रद्धालु भक्त घाटों पर पहुंचेंगे, इसके बाद उदीयमान सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करेंगे, इसके बाद व्रतियों का 36 घंटों का निर्जला उपावास सोमवार को  उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पारण के साथ पूरा होगा।

मालूम हो कि यह प्राकृतिक सौंदर्य और परिवार के कल्याण के लिए की जाने वाली एक महत्वपूर्ण पूजा है। इस पूजा में नदी तालाब जैसी जगह होना अनिवार्य है, यही कारण है कि छठ पूजा के लिए सभी नदी तालाब की साफ सफाई की जाती है और नदी तालाब के तट पर घाट बनाकार सजाया जाता है। छठ महापर्व को  पारिवारिक सुख-समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। स्त्री और पुरुष समान रूप से इस पर्व को मनाते हैं। महिलाओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति के साथ, पुत्र की कुशलता के लिए सामान्य तौर पर महिलाएं यह व्रत रखती हैं, वही  पुरुष भी पूरी निष्ठा से अपने मनोवांछित कार्य को सफल होने के लिए व्रत रखते हैं। मालूम हो कि इस अवसर पर राज्य सरकार , जिला प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन, गुवाहाटी नगर निगम( जीएमसी) की ओर से संपूर्ण सहयोग किया गया।  वही छठ घाटों पर  अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के जवान तैनात  दिखे।