पलवल के राजीव नगर में रहने वाले 38 वर्षीय राम कुमार बघेल लगभग 24 सालों से पर्यावरण संरक्षण के लिए मुहिम चला रहे हैं। राम कुमार बघेल इस्तेमाल में नहीं आने वाली चीजों का इस्तेमाल करके पक्षियों के रहने के लिए घर बनाते हैं। साथ ही बोतलों, प्लास्टिक की केन और चाय-कॉफी के डिस्पोजल, नारियल के खोल में पेड़-पौधे लगाकर उन्हें दूसरे लोगों को बांटते हैं ताकि दूसरे लोग भी अपने घरों में पेड़-पौधे लगाकर पर्यावरण को संरक्षित कर सकें। राम कुमार बघेल बताते हैं कि लगभग 12 साल की उम्र से ही वो खराब होते पर्यावरण को लेकर चिंतित रहने लगे थे और फिर लगभग 14 साल की उम्र में उन्होंने पर्यावरण को बचाने की मुहिम शुरू की। अब तक बघेल हजारों पौधे लोगों को बांट चुके हैं। वो गलियों व नालियों में उगने वाले पौधों को अपने घर में शिफ्ट कर उनकी देखभाल करते हैं।
फिर स्कूल-कॉलेजों में जाकर लोगों को बांटते हैं। इतना ही नहीं उन्हें पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हैं। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाने चाहिए ताकि बढ़ते प्रदूषण को रोका जा सके। इससे पर्यावरण ठीक होगा। राम कुमार बघेल ने अपने घर को चिडिय़ाघर में तब्दील कर दिया है। उन्होंने टीन से पक्षियों को दाना डालने और उनके रहने की व्यवस्था की है। साथ ही मिट्टी और नारियल के खोल से पक्षियों के लिए आशियाना बनाया है। जिसमें पक्षी अपना घोंसला डालकर रहते हैं। वे मकान की छजली के नीचे लटका देते हैं ताकि बारिश से पक्षियों का आशियाना खराब न हो। उन्होंने बताया कि मिट्टी के बर्तन में छोटा सा छिद्र करके उसको पाइपों पर लटका देते हैं ताकि बारिश का पानी छिद्र से निकल जाए और बच्चों को सेफ रखा जा सके।