भारत का पड़ोसी छोटा सा देश भूटान भले ही आकार में छोटा हो, किन्तु सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण देश है। सदियों से भारत और भूटान के बीच घनिष्ठ संबंध रहा है। भूटान की बाहरी सीमाओं की रक्षा भारत करता है, लेकिन चीन की गिद्ध दृष्टि भूटान पर लगी हुई है। चीन भूटान के साथ दोस्ती गांठकर उस पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। हाल ही में भूटान के विदेश मंत्री की बीजिंग यात्रा के दौरान चीनी सरकार ने सीमा विवाद हल करने एवं राजनीतिक संबंध स्थापित करने के लिए भूटान पर दबाव डाला था। चीन की इस चाल के बाद भारत का चौंकन्ना होना स्वाभाविक है। डोकलाम विवाद के बाद भारत चीन के प्रति हमेशा सतर्क रहा है। चीन भूटान की सीमा तक अपनी पहुंच बनाना चाहता है, ताकि भारत पर दबाव डाला जा सके। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने भूटान नरेश को ही भारत बुला लिया, ताकि चीन की जालसाजी के बारे में पता लगाया जा सके।
भूटान नरेश दस दिन की भारत यात्रा पर पहुंचे थे। उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सीधी रेल सेवा आरंभ करने पर सहमति बनी है। भूटान नरेश और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच असम के कोकराझाड़ जिले तथा भूटान के गेलेफू के बीच रेलमार्ग का अंतिम सर्वेक्षण करने पर सहमति बनी है। पश्चिम बंगाल के बंदरहाट से भूटान के समसे के बीच भी रेलमार्ग के निर्माण पर सहमति बनी है। कोकराझाड़-गेलेफू रेल सेवा आरंभ होने से भूटान के लोगों के लिए यात्रा सुगम हो जाएगी। अभी तक भूटान के लोग पहाड़ी सड़क मार्ग पर ही निर्भर है। रेलमार्ग के निर्माण से वस्तुओं की ढुलाई आसान हो जाएगी, क्योंकि भूटान में अधिकांश वस्तुएं भारत से जाती है। भूटान की कई पनबिजली परियोजनाओं के संचालन में भारत मदद करता है। असम के साथ भूटान का गहरा संबंध रहा है। भूटान नरेश अपनी यात्रा के शुरुआती तीन दिन असम में बिताए तथा काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का परिभ्रमण किया।
असम के लोग व्यापार एवं पर्यटन के लिए भूटान जाते हैं। इसीलिए दोनों देशों के बीच प्रस्तावित रेलमार्ग से यातायात आसान होगा। भारत के तीन राज्यों पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा भूटान से लगी हुई है। चीन लगातार भूटान पर दबाव डालकर उसकी जमीन हथियाना चाहता है ताकि सीधे भूटान तक उसकी पहुंच हो सके। चीन की यह कोशिश भारत के लिए खतरे की घंटी है। डोकलाम में हुए विवाद के वक्त भारत भूटान के समर्थन में लगभग ढाई महीने चट्टान की तरह खड़ा रहा। भारत को चीन-भूटान के बीच चलने वाली किसी भी गतिविधियों पर लगातार पैनी नजर रखनी होगी।