उत्तरकाशी : उत्तरकाशी टनल हादसे में फंसे लोगों को सकुशल बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान आज मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। टनल के अंदर फंसे 40 लोगों के लिए पौन इंच की पाइप किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। पौन इंच की पाइप से टनल में फंसे लोगों को ऑक्सीजन, दवाइयां सहित खाने-पीने की सामाग्री उपलब्ध करवाई जा रही है। सिलक्यारा टनल का एक लोहे का पाइप वहां फंसे मजदूरों के लिए लाइफ लाइन बन चुका है। यही एक माध्यम है जिसके जरिए वो टनल के बाहर रेस्क्यू टीम और अपने परिजनों से बातचीत कर पा रहे हैं। और जीवित रहने के जरूरी ऑक्सीजन के साथ खाद्य सामग्री भी इसी पाइप के जरिए मिल रही है। टनल में फंसे मजदूरों की जीवन की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी ऑक्सीजन थी। ऑक्सीजन कम होने या खत्म हो जाने का मतलब था अनहोनी। तब काम आया टनल में लगा पौने से एक इंच का पाइप।
इस पाइप की मदद से ऑक्सीजन का प्रवाह करना सामान्य हो पाया। रेस्क्यू टीम के सामने दूसरी बड़ी समस्या मजदूरों के साथ संवाद कायम करने की थी। सिग्नल न होने और बैटरियां डाउन हो जाने की वजह से वॉकी-टॉकी काम नहीं कर पा रहे थे। तब निर्माण कंपनी के एक कर्मचारी ने परंपरागत तरीके की याद दिलाते हुए पाइप के जरिए ही बात करने की सलाह दी और वो काम भी कर गई। अब पाइप के जरिए ही मजदूर रेस्क्यू टीम के साथ लगातार बातचीत कर पा रहे हैं। ऑक्सीजन को भेजना तो आसान था, लेकिन रेस्क्यू टीम के सामने बड़ी चुनौती मजदूरों तो खाद्य पदार्थ भेजने की थी। मलबे की वजह से सारे रास्ते बंद थे। माध्यम केवल एक पाइप ही था। फिर कंप्रेशर के जरिए हल्के वजन के खाद्य पदार्थों को भेजने में भी पाइप ही जरिया बना। पाइप के बाहरी सिरे से रेस्क्यू टीम थोड़ी थोड़ी मात्रा में चने, मखाने, किशमिश आदि डालते और कंप्रेशर के जरिए उन्हें तेजी से दूसरी तरफ धकेला जाता। दूसरी तरफ किसी कपड़े की मदद से वो उस खाद्य सामग्री को इकट्ठा कर लेते।