वनडे विश्वकप क्रिकेट के पहले सेमीफाइनल मैच में भारत का मुकाबला न्यूजीलैंड से होगा। मुंबई के वानखेड़े मैदान पर पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम फायदे में रहेगी, जबकि लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सेमीफाइनल में भारत, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की टीम पहुंची है। इन्हीं चार टीमों में से कोई एक टीम विश्व विजेता बनेगी। भारत ने लीग के सभी नौ मैचों को जीतकर सेमीफाइनल में जगह बनाई है, जबकि न्यूजीलैंड की टीम नौ में से पांच मैच जीतकर अंतिम चार में पहुंची है। अब तक आईसीसी ट्राफी के वनडे विश्वकप, टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्राफी एवं विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में 2000 के बाद खेले गए 14 मुकाबलों में से चार बार भारत को जीत मिली है, जबकि 10 बार न्यूजीलैंड ने विजय हासिल की है। वर्ष 2019 में वनडे विश्वकप क्रिकेट के सेमीफाइनल तथा वर्ष 2021 में खेले गए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में न्यूजीलैंड ने भारत को शिकस्त दी थी। लेकिन विभिन्न स्थानों पर खेले गए 117 एकदिवसीय मैचों में भारत का पलड़ा न्यूजीलैंड के मुकाबले भारी रहा है। टीम इंडिया के वर्तमान प्रदर्शन को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि भारत न्यूजीलैंड को वानखेड़े के मैदान पर शिकस्त देगा।

भारत ने विश्वकप में खेले गए नौ मैचों में से सात मैचों में विपक्षी टीम को पूरी तरह आउट कर दिया, जबकि दो बार ऐसा नहीं हो पाया। भारत ने लीग मैच में किसी भी विपक्षी टीम को 300 को आंकड़ा पार करने नहीं दिया। केवल न्यूजीलैंड तथा अफगानिस्तान की टीम क्रमश: 273 और 272 बना सकी। दो बार तो भारतीय टीम ने विपक्षी टीम को 100 के भीतर ही पैवेलियन भेज दिया। इस बार की टीम ने बल्लेबाजी एवं गेंदबाजी दोनों ही क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया है। भारत की कमजोर कड़ी गेंदबाजी इस विश्वकप में सबसे मजबूत कड़ी साबित हो रही है। भारत के पांच शीर्ष बल्लेबाजों ने 2100 से ज्यादा रन बनाये हैं, जिसमें तीन बल्लेबाजों के 400 से ज्यादा रन हैं। यह आंकड़ा भारत के लिए अब तक का रिकॉर्ड है। इसी तरह गेंदबाजी में गेंदबाजों ने नौ मैचों में 90 में से 86 विकेट हासिल किया। 85 विकेट के साथ दक्षिण अफ्रीका दूसरे स्थान पर तथा 76 विकेट के साथ आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा। बुमराह ने नौ मैचों में 17, जडेजा ने 9 मैचों में 16, कुलदीप ने नौ मैचों में 14 तथा सिराज नौ मैचों में 12 विकेट लिये। हार्दिक पांडया के टीम से हटने के बाद मोहम्मद शमी को अंतिम एकादश में शामिल किया गया।

शमी के आने के बाद भारत का गेंदबाजी आक्रमण और घातक हो गया। बुमराह, शमी, सिराज, जडेजा एवं कुलदीप के सामने विपक्षी टीम हमेशा दबाव में नजर आए। अब भारत की कोशिश पुरानी हार का बदला लेने की होगी। वानखेड़े के मैदान पर भारतीय टीम की अग्निपरीक्षा होगी। भारत को 15 नवंबर के मैच को सावधानी पूर्वक खेलना होगा, क्योंकि न्यूजीलैंड की टीम किसी भी वक्त पासा पलटने में माहिर है। न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन लंबे विश्राम के बाद वापसी कर रहे हैं। वे किसी भी वक्त भारत की रणनीति बिगाड़ सकते हैं। भारतीय पिच पर खेलने का उनको काफी अनुभव भी है। नॉक आउट चरण में पिछला प्रदर्शन कोई मायने नहीं रखता है। अब भारत को वर्ष 2011 के बाद वनडे विश्वकप का खिताब जीतने का मौका है। भारतीय बल्लेबाजों को न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों बोल्ट, साउदी एवं फग्र्यूसन के सामने संभल कर खेलना होगा। न्यूजीलैंड के युवा बल्लेबाज रचिन रवीन्द्र भी अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका सकते हैं।