रविवार को देशभर में दीपावली को लेकर धूम मची हुई थी। कई शहरों में जमकर आतिशबाजी की गई। तेज आवाज और चमकदार पटाखों से आसमान जगमग था। लेकिन तमिलनाडु के इरोड जिले में लोगों ने आतिशबाजी से किनारा किया। यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि पक्षियों को हानि न हो इसके लिए लिया गया। इरोड जिले के सात गांवों से सटे पक्षी अभयारण्य को नुकसान या दिक्कत न हो, इसलिए यह निर्णय लिया गया था। गांववासियों के मुताबिक, बड़ी संख्या में यहां पक्षी निवास करते हैं, पटाखों की आवाज और चिंगारी से उन्हें नुकसान न हो, इसलिए हमने पटाखों से दूरी बना ली थी। बता दें इरोड से 10 किलोमीटर दूर वदामुगम वेल्लोड के पास पक्षी अभयारण्य स्थित है।
कई क्षेत्रों से प्रवासी पक्षी और स्थानीय पक्षी प्रजातियां अक्तूबर से जनवरी माह के बीच अंडे देते हैं। जिसके लिए बड़ी संख्या में यहां पक्षी अभयारण्य में पहुंचते हैं। अमूमन इन्हीं माह के दौरान दीपावली पर्व भी पड़ता है। जिसके चलते गांववासियों ने सादगी से दीपावली मनाने का फैसला लिया। न कोई आतिशबाजी, न कोई धूम धड़ाके की आवाज, सिर्फ दीये जलाकर दीपावली मनाई। ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले 22 वर्षों से इस संरक्षण दृष्टिकोण का पालन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि दिवाली के दौरान वे अपने लिए नए कपड़े खरीदते हैं, केवल फुलझडिय़ां जलाने की अनुमति देते हैं। लेकिन आवाज वाले पटाखों पर सख्त मनाही है। सेलप्पमपलयम, वदामुगम वेल्लोड, सेम्मांडमपालयम, करुक्कनकट्टू वलासु, पुंगमपाडी और दो अन्य गांवों में मौन दीपावली की परंपरा को बरकरार रखा गया।