देश में दीपावली का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। 14 सालों के बाद जब भगवान राम वनवास से लौटकर अयोध्या वापस आए थे, तो लोगों ने घी के दीपक जलाए थे। तब से ही दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। हिंदू धर्म में दीपावली का त्योहार बेहद खास है। इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके साथ ही लोग अपने घर और मंदिरों में दीपक जलाते हैं। भारत के अलावा दुनिया के अलग-अलग देशों में भी दिवाली मनाई जाती है। हालांकि भारत में कई जगहों पर दिवाली का त्योहार नहीं मनाया जाता है। इन स्थानों पर दिवाली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा भी नहीं की जाती है और लोग पटाखे भी नहीं जलाते हैं। आपको यह जानकर हैरानी हो रही होगी और यकीन नहीं हो रहा होगा।
आइए आज आपको बताते हैं कि भारत के इन जगहों पर आखिर रोशनी का त्योहार दिवाली क्यों नहीं मनाई जाती है और इसके पीछे की मान्यता क्या है? इन दिनों दिवाली की हर तरफ धूम है, लेकिन दक्षिण भारत में कुछ जगहों पर दिवाली नहीं मनाई जाती है। रोशनी के त्योहार को नहीं मनाने के पीछे एक मान्यता है। भारत के केरल राज्य में दिवाली नहीं मनाई जाती है। प्रदेश के सिर्फ कोच्चि शहर में धूमधाम से दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। आपके मन में सवाल खड़ा हो रहा होगा कि आखिर इस राज्य में दिवाली क्यों नहीं मनाई जाती है? यहां पर दिवाली नहीं मनाए जाने के पीछे कुछ वजहे हैं। मान्यता है कि केरल के राजा महाबली की दिवाली के दिन मौत हो गई थी। इसके कारण तब से यहां पर दिवाली का त्योहार नहीं मनाया जाता है। केरल में दिवाली न मनाने की पीछे दूसरी वजह यह भी है कि हिंदू धर्म के लोग बहुत कम हैं। यह भी बताया जाता है कि राज्य में इस समय बारिश होती है जिसकी वजह से पटाखे और दीए नहीं जलते हैं। तमिलनाडु में भी कुछ जगहों पर दिवाली नहीं मनाई जाती है। वहां पर लोग नरक चतुदर्श का त्योहार धूमधाम से मनाते हैं। मान्यता है कि भगवान श्रीकृृष्ण ने कार्तिक मास के कृृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर राक्षस का वध किया था। इस दिन को छोटी दिवाली के रूप में मनाया जाता है।