बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 7 नवंबर को विधानमंडल के दोनों सदनों में जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर दिए गए आपत्तिजनक बयान के बाद हंगामा मच गया है। उनका यह बयान अब सियासी मुद्दा बन चुका है। भाजपा ने इस बयान को लेकर मुख्यमंत्री से विधानसभा एवं विधान परिषद में माफी मांगने एवं इस्तीफा देने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने अगले दिन विधानसभा एवं विधान परिषद में इस बयान के लिए माफी मांगी एवं अपने ही बयान की निंदा की। शायद नीतीश कुमार देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जिन्होंने अपने ही बयान की निंदा की है। भाजपा अब इस बयान को लेकर मुद्दा बना चुकी है। मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है। बिहार के मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका दायर हुई है। इस याचिका में लड़कियों की शिक्षा एवं प्रजनन दर पर मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयान को वापस लेने की मांग की गई है। अदालत इस मामले पर 25 नवंबर को सुनवाई करेगी।

इधर राष्ट्रीय महिला आयोग ने बिहार विधानसभा के अध्यक्ष को पत्र लिखकर नीतीश कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। भाजपा महिला मोर्चा के सदस्याओं ने मुख्यमंत्री का घेराव किया तथा बुधवार को विधानसभा में जाने से रोका। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश के बयान को सियासी मुद्दा बना दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली की गद्दी पर काबिज होने का सपना देखने वाले नीतीश कुमार जैसे नेता को विधानमंडल में माताओं एवं बहनों की उपस्थिति में ऐसा बयान देना शोभा नहीं देता। इस मुद्दे पर जुबान बंद रखने के लिए प्रधानमंत्री ने इंडिया गठबंधन के दूसरे नेताओं को भी निशाने पर लिया। यह वाकया उस समय हुआ जब मुख्यमंत्री विधानमंडल के दोनों सदनों में जातिगत सर्वे की आर्थिक रिपोर्ट पेश कर रहे थे। उस दौरान उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर आपत्तिजनक बयान दे दिया। वे जन्म दर गिरने के बारे में व्याख्या कर रहे थे।

अब भाजपा नीतीश के इस्तीफे से कुछ भी कम स्वीकार करने के मूड में नहीं है। नीतीश के इस बयान से इंडिया गठबंधन खासकर जनता दल-यू तथा राष्ट्रीय जनता दल को सियासी नुकसान पहुंच सकता है। भाजपा इस मुद्दे को जोर-शोर से उछाल रही है। इससे देश खासकर बिहार के महिला मतदाताओं पर नकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि जनता दल-यू तथा राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं द्वारा इस मामले की लीपापोती की जा रही है। नीतीश का यह बयान पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुद्दा बन चुका है। बिहार सरकार ने जातिगत सर्वे की रिपोर्ट के बाद बिहार के दोनों सदनों से आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने को अनुमोदित कर दिया है। इससे बिहार के महागठबंधन को राजनीतिक लाभ मिल सकता है। ङ्क्षकतु नीतीश के आपत्तिजनक बयान ने सारे मामले को भटका दिया है। 18 साल तक मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्री रहने वाले नीतीश कुमार द्वारा ऐसा बयान देना शोभा नहीं देता।