रायपुर/एजल : पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की प्रथम कड़ी में आगामी कल छत्तीसगढ़  की 20 सीटों और मिजोरम की 40 सीटों पर मतदान  कराए जाएंगे। चुनाव आयोग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। साथ ही चुनाव को शांतिपूर्वक और निष्पक्ष कराए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।  सभी मतदान केंद्रों पर मतदान पार्टी के अधिकारी और कर्मचारी आज शाम ही अपने- अपने गतंव्य पर पहुंच गए।  उल्लेखनीय है कि  छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग की 12 और राजनंदगांव क्षेत्र की 8 सीटों पर मंगलवार को वोट डाले जाएंगे। 20 सीटों में से 10 पर सुबह सात बजे से दोपहर 3 बजे तक जबकि शेष 10 सीटों पर सुबह 8 बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होगा। पहले चरण की 20 सीटों पर कुल 223 उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा में  है।

पहले चरण में 40 लाख 78 हजार 681 मतदाता 5304 केंद्रों पर मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। प्रचार के दौरान पीएम मोदी समेत भाजपा ने सट्टेबाजी एप घपले के बहाने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व कांग्रेस पर निशाना साधा तो कांग्रेस ने अपनी गारंटी और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग को मुख्य मुद्दा बनाया। वहीं दूसरी ओर मिजोरम में 40 विधानसभा सीटों के लिए 1276 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। राज्य के 8,51,895 मतदाता 174 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे। राज्य में मिजो नेशनल फ्रंट, जोरम पीपुल्स मूवमेंट, कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला है। मिजो, जोरम और कांग्रेस ने सभी 40 जबकि भाजपा ने 23 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं।

आम आदमी पार्टी ने भी राज्य में चार सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। चुनाव में मणिपुर हिंसा का भी असर देखने को मिलेगा। जानकार बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस भाजपा से काफी मजबूत दिख रही है,परंतु भाजपा ने महादेव एप के माध्यम से धोखाघड़ी और सीएम भूपेश बघेल पर पैसे लेने का आरोप लगाकर कांग्रेस और सीएम भूपेश बघेल को बैकफुट पर ला खड़ा किया है। दूसरी ओर मिजोरम में सत्ताधारी पार्टी एमएनएफ  की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है, परंतु कांग्रेस ने अश्वमेघ के घोड़े को अपनी ओर करने में कोई कोर- कसर नहीं छोड़ी है। कांग्रेस बार- बार एमएनएफ को भाजपा का सहयोगी बताकर  मिजोरम  के चुनावी समीकरण को मोड़ने की पूरी कोशिश की। कारण कि पड़ोसी राज्य मणिपुर में जातीय हिंसा के लिए मिजोरम के लोग भाजपा को दोषी करार दे रहे हैं।