दिवाली और ठंड का मौसम किसे नहीं पसंद। चिपचिपाती गर्मी से राहत, खुशनुमा हवाएं और नवंबर-दिसंबर की सुहानी शामें। लेकिन इन सबके साथ आता है इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार। कभी गले में खराश ,कभी सिर में भयानक दर्द तो कभी बुखार की वजह से ऑफिस और रोजमर्रा के कामों का नुकसान। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में हर साल करीब 100 करोड़ लोग सीजनल इंफ्लुएंजा यानी बदलते मौसम के साथ आने वाले सर्दी-जुकाम से परेशान होते हैं। चूंकि वायरस की वजह से होने वाले सर्दी-जुकाम की कोई दवा या टीका नहीं है, इसलिए हमारी इम्यूनिटी ही इसके खिलाफ हमारा रक्षा कवच है। इम्यूनिटी बढ़ाने के कई उपाय हैं, जैसे अच्छी डाइट, कसरत और योग। लेकिन इन ‘अवेंजर्स’ का एक आयरन मैन भी है- विटामिन-सी। जुलाई, 2021 में भारतीय खाद्य संरक्षण एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कुछ निर्देश जारी किए।
निर्देश इस बारे में थे कि हमें प्रतिदिन कितनी मात्रा में पोषक तत्वों की जरूरत है। ये भारतीयों के लिए नए रेकमेंडेड डाइटरी एलाउएंस थे। इससे पहले भी एफएसएसएआई समय-समय पर आरडीए जारी करता रहता है, लेकिन इस बार इसमें एक बदलाव देखा गया। रोजाना विटामिन-सी की सुझाई खुराक, जो पहले 40 एमजी/डी थी, इसे बढ़ाकर 80एमजी/डी कर दिया गया। यह दोगुनी बढ़त विटामिन-सीके फायदों और उसकी जरूरत को देखते हुए की गई थी। आप समझ सकते हैं कि विटामिन-सी हमारे लिए कितना जरूरी है।
लेकिन कई बार हम ये दिन की 80 माइक्रोग्राम खुराक भी पूरी नहीं कर पाते और विटामिन-सी की कमी का शिकार होते हैं। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि हमारा शरीर खुद विटामिन-सी नहीं बना सकता। न ही इसे लंबे समय के लिए इसे स्टोर कर सकता है। इसलिए हमें हमेशा विटामिन-सीसे भरपूर सप्लीमेंट्स लेने पड़ते हैं। अगर हम ऐसा नहीं करते तो शरीर में इसकी कमी हो जाती है। लंबे समय तक विटामिन-सी की कमी रहे तो शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है।