पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर को अशांत करने के लिए सीमा पार से साजिश रची जा रही है। पाकिस्तानी सेना तथा वहां की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई पाकिस्तान से आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराने के लिए प्रयत्नशील है। सीमा पर कड़ी चौकसी के कारण उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पा रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान की तरफ से आतंकियों को घुसपैठ कराने की कोशिश की गई थी जिसे सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया। पाकिस्तानी सेना आतंकियों के घुसपैठ को सुगम बनाने के लिए कवर फायरिंग कर रही थी। भारत की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ है। अपनी नई रणनीति के तहत पाकिस्तान हाईब्रिड आतंकियों का इस्तेमाल टार्गेट किलिंग के लिए कर रहा है। बहुत-से स्थानीय युवकों को ट्रेनिंग देकर मैदान में उतार दिया जा रहा है ताकि सुरक्षा एजेंसियों को उस पर शक न हो।

इन आतंकियों की भर्ती स्थानीय स्तर पर की जाती है। पिछले 29 अक्तूबर को आतंकियों ने उत्तर प्रदेश के श्रमिक को गोलियों से भून डाला। 30 अक्तूबर को श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के पुलिस इंस्पेक्टर मशरूर अहमद को गोली मार दी गई। अस्पताल में मशरूर की हालत नाजुक बनी हुई है। इसी तरह 31 अक्तूबर को बारामूला में हवलदार गुलाम मोहम्मद डार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 एवं 35ए हटने के बाद शांति लौटी है। पड़ोसी देश टार्गेट किलिंग द्वारा माहौल बिगाडऩे की कोशिश में है। अभी तक सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में कुल 60 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया है, जिसमें 47 विदेशी आतंकी हैं। सुरक्षा बलों ने तीन आतंकियों एवं उसके मददगार को भी पकड़ा है। इस वर्ष जम्मू-कश्मीर के पीर पंजाल की गुफाओं सहित अन्य दुर्गम क्षेत्रों में 107 आतंकी सक्रिय हैं, जिसमें 71 आतंकी विदेशी हैं। पिछले वर्ष 137 आतंकियों के सक्रिय होने की खबर थी। सुरक्षा बलों के अभियान में वर्ष 2022 में 187, वर्ष 2021 में 180, वर्ष 2020 में 221, वर्ष 2019 में 157 तथा वर्ष 2018 में 257 आतंकियों को यमलोक पहुंचाया गया था। प्रश्न यह उठता है कि जब सीमा पर चौकसी है तथा जवान अलर्ट पर हैं तो उग्रवादी किस तरह घुसपैठ कर रहे हैं।

आतंकी संगठन स्थानीय युवकों की भर्ती कर अपना मकसद पूरा कर रहे हैं। नेपाल के रास्ते भी आतंकियों की घुसपैठ हो रही है। भारत-नेपाल सीमा खुला हुआ है, जहां सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था नहीं है। इस स्थिति का फायदा उठाकर आतंकी नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश कर रहे हैं। आईएसआई भी नेपाल में सक्रिय है। जिस तरह हमास ने इजरायल पर हमला किया उससे भारत को सीख लेने की जरुरत है। आतंकियों की बदलती रणनीति को ध्यान में रखकर सुरक्षा बलों को भी अपनी कार्यशैली में बदलाव करना होगा। केरल के एर्नाकुलम के कंवेंशन सेंटर में हुई घटना ने देश को चिंतित कर दिया है। वहां आयोजित प्रार्थना सभा में हुए विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई तथा 51 घायल हो गए थे। इस घटना से सबक लेकर आतंकियों के खिलाफ हर वक्त चौकस रहने की जरुरत है।

हमास द्वारा इजरायल पर किये गए हमले के बाद पाकिस्तानी सीमा से सटे लांच पैड पर आतंकियों की गतिविधियों में तेजी आई है। भारत सरकार को व्यापक रणनीति के साथ आगे बढ़ाना होगा। पाकिस्तान में चुनाव होने वाले हैं। ऐसी स्थिति में वहां की सरकार तथा सेना लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भारत के साथ तनाव बढ़ा सकती है। दुनिया में आतंकवाद को लेकर लोगों का अलग-अलग नजरिया है। दुनिया के देश अपने लाभ-हानि के हिसाब से आतंकवाद की परिभाषा तय कर रहे हैं जो आम लोगों के लिए घातक है। चीन सहित कुछ मुस्लिम राष्ट्र ऐसे तत्वों को प्रश्रय दे रहे हैं। इजरायल-हमास युद्ध में भी ईरान, तुर्की, लेबनान, कतर जैसे देश हमास के पक्ष में खड़े हैं। आतंकवाद पर सर्वसम्मत रणनीति बनाकर उसको जड़ से खत्म करने के लिए काम करना चाहिए। पाकिस्तान जैसे पड़ोसी पर कभी भी भरोसा करने की गलती नहीं करनी चाहिए।