गुवाहाटी : आतंकी संगठन अल्फा (आई) ने तथाकथित मुकदमों के जरिए अपने साथियों को सजा देकर काला इतिहास रच दिया है। महज एक साल में अल्फा ने म्यामां के कैंपों में ट्रायल के नाम पर खौफनाक वारदातों को अंजाम दिया। वैसे अल्फा नेतृत्व मौत की सजा को गुप्त रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह देर सबेर सामने आ जाती है। अल्फा (आई) नेतृत्व ने यौन उत्पीड़न के आरोप में साधारण सभा के उपाध्यक्ष लाचित हजारिका उर्फ ए.जेड असम और प्रतिभाशाली एथलीट नयनमणि चेतिया उर्फ बर्नाली असम को मौत की सजा सुनाई थी। इस घटना की सनसनी खत्म होने से पहले ही पाठशाला की विभाकर कलिता और कामपुर के तन्मय बोरा को मौत की खबर आई है।

दोनों की गोली मारकर हत्या करने की घटना की खबर मीडिया में आने के बाद डीजीपी जीपी सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में परेश बरुवा का नाम लिए बिना कहा कि आपको उन्हें घर जाने देना चाहिए था। उन्हें क्यों मारा जाना चाहिए? एक अन्य पोस्ट में डीजीपी ने अल्फा सदस्यों से पूछा कि एक कृृतघ्न अत्याचारी के लिए अपना जीवन क्यों बर्बाद कर रहे हैं? इसके बाद अल्फा नेतृत्व की ओर से एक बयान जारी कर विभाकर कलिता और तन्मय बोरा की मौत की सजा की सूचना जारी की और पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह को चेतावनी तक दे डाली।

मीडिया को भेजे गए एक ई-मेल बयान में अल्फा के प्रचार विभाग के सदस्य कैप्टन रुमेल असम ने संगठन की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि असम पुलिस प्रमुख जीपी सिंह ने क्या किया है? डीजीपी के रूप में कार्यभार संभालने के बाद असम पुलिस में कितनी फर्जी मुठभेड़, पुलिस द्वारा यौन उत्पीड़न, शारीरिक उत्पीड़न, पुलिस की ओर काला धन-नकली सोना-मादक पदार्थों की तस्करी, पुलिस द्वारा जबरन वसूली, पुलिस सदस्यों की आत्महत्या आदि की घटनाएं बढ़ी हैं। क्या आप उस पर नजर रखते हैं?