स्टॉकहोम : साहित्य में नोबेल पुरस्कार नॉर्वे के लेखक जॉन फॉसे को  उनके अभिनव नाटकों और गद्य के लिए दिया गया है, जो अनकही को आवाज देते हैं। स्वीडिश अकादमी ने यह जानकारी दी। अकादमी के स्थायी सचिव मैट्स माल्म ने बृहस्पतिवार को स्टॉकहोम में पुरस्कार की घोषणा की। मालूम हो कि जॉन 1959 में नॉर्वे म पैदा हुए। 7 साल की उम्र में उनका भयानक एक्सीडेंट हुआ था। इसमें वो बाल-बाल बचे थे। उनकी लिखावट पर इस हादसे का गहरा असर दिखाई देता है। उनकी पहली नॉवेल रेड-ब्लैक 1983 में छपी थी। उनकी किताबों को 40 से ज्यादा भाषाओं में ट्रांसलेट किया जा चुका है। लेखक के तौर पर शुरुआती दिनों में जॉन को संगीत का भी काफी शौक था। वो गानों की धुन खुद क्रिएट करते थे।

जॉन को डेली टेलीग्राफ ने दुनिया के 100 लिविंग जीनियस की लिस्ट में 83वें नंबर पर रखा है। जॉन फॉसे अपनी कहानियों और नाटकों के जरिए इंसान के अस्तित्व को लेकर भी कई तरह के सवाल उठाते हैं। उनका नॉवेल ए न्यू नेम सात किताबों का संग्रह है। इसमें उन्होंने एक बूढ़े आदमी की भगवान से बातचीत को बताया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक जॉन उन लेखकों में शामिल हैं, जिनकी कहानियों में गहरा मतलब छिपा होता है। स्वीडिश आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल द्वारा छोड़ी गई वसीयत के तहत नोबेल पुरस्कारों में 1.1 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (10 लाख डॉलर) का नकद पुरस्कार दिया जाता है। दिसंबर में आयोजित पुरस्कार समारोह में विजेताओं को 18 कैरेट का स्वर्ण पदक और डिप्लोमा भी प्रदान किया जाएगा। पिछले साल फ्रांसीसी लेखिका एनी एर्नाक्स ने यह पुरस्कार जीता था। एर्नाक्स 119 नोबेल साहित्य पुरस्कार विजेताओं में से सिर्फ 17वीं महिला थीं।