भारतीय सनातन धर्म में देवी-देवताओं की आराधना के साथ व्रत-उपवास रखने की परम्परा काफी पुरातन है। ऐसी मान्यता है कि भक्तिभाव के साथ की गई आराधना से मनोकामना की पूर्ति बताई गई है। भाद्रपद का प्रमुख पर्व अनंत चतुर्दशी की अनंत महिमा है। इस पर्व पर क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर शयन करने वाले भगवान् श्रीविष्णु जी की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिषविद् विमल जैन  ने बताया कि अनंत चतुर्दशी का पर्व 28 सितम्बर, गुरुवार को हर्ष-उमंग व उल्लास के साथ मनाया जाएगा।  ज्योतिर्विद् ने बताया कि भाद्रपद शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि 27 सितम्बर, बुधवार को रात्रि 10 बजकर 19 मिनट पर लगेगी जो कि 28 सितम्बर, गुरुवार को सायं 6 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। अनंत चतुर्दशी के व्रत से व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान् श्रीविष्णु जी के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि का सुयोग बना रहता है, साथ ही व्यक्ति का जीवन धन-धान्य से परिपूर्ण रहता है। अनंत चतुर्दशी के व्रत को 14 वर्ष तक नियमपूर्वक करने पर जीवन के समस्त दोषों का शमन होता है तथा सुख-समृद्धि में अभिवृद्धि होती रहती है।

अनन्त चतुर्दशी के व्रत व पूजा का विधान : ज्योतिषविद् विमल जैन के अनुसार प्रातःकाल सूर्योदय के समय ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। तत्पश्चात् आराध्य देवी-देवता की पूजा के उपरान्त अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गन्ध व कुश लेकर अनन्त चतुर्दशी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख होकर करना चाहिए। 

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