जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन को करारा जवाब दिया है। इस सम्मेलन की अहमियत से भारत बिल्कुल वाकिफ है। चीन ने जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले विवादास्पद नक्शा जारी कर भारत तथा चीन के कई पड़ोसी देशों के क्षेत्रों को अपने क्षेत्र में दिखा दिया था। चीन ने भारत द्वारा जी-20 के लिए दिए स्लोगन 'वसुधैव कुटुम्बकम' का यह कह कर विरोध किया था कि संयुक्त राष्ट्र संघ से संस्कृृत भाषा को अभी तक मान्यता नहीं मिली है। ड्रैगन ने अरुणाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर में आयोजित जी-20 की बैठक का विरोध किया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। दुनिया में भारत के बढ़ते रुतबे को देखते हुए चीन जी-20 शिखर सम्मेलन को नाकाम करने में लगा हुआ है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनङ्क्षपग का भारत न आना चीन की इसी रणनीति का एक हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित मंच से दक्षिण चीन सागर तथा ङ्क्षहद-प्रशांत क्षेत्र का मुद्दा उठाकर चीन को करारा जवाब दिया है। प्रधानमंत्री ने आसियान के मंच से वसुधैव कुटुम्बकम का भी नारा देकर चीन को औकात बताने की कोशिश की है। मोदी ने आसियान एवं ङ्क्षहद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को आश्वस्त किया कि भारत उनके साथ खड़ा है। अमरीकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भी अपने संबोधन में ङ्क्षहद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को आश्वासन दिया कि अमरीका आप लोगों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। इस शिखर सम्मेलन में भी चीन के राष्ट्रपति की जगह वहां के प्रधानमंत्री ली कियांग ने चीन का प्रतिनिधित्व किया। कियांग ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय गुटबाजी से बचने तथा बातचीत से द्विपक्षीय मदभेद को दूर करने की सलाह दी। सबको मालूम है कि चीन की कथनी और करनी में कितना अंतर है। चीन अपने पड़ोसी देशों के क्षेत्रों को अपना बताकर उनको धमकाता रहता है।

भारत ने फिलीपींस, वियतनाम एवं जापान जैसे चीन के पड़ोसियों के साथ रणनीति साझेदारी मजबूत कर चीन को उसी की भाषा में जवाब देने की पहल की है। भारत अब चीन के पड़ोसी देशों को अपने सुपर सोनिक मिसाइल ब्रह्मोस तथा उन्नत लड़ाकू विमान तेजस देने का निर्णय लिया है। विवादास्पद नक्शे के मामले में भी पहली बार ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, जापान आदि देशों ने एक साथ चीन को घेरा है। यह भारत के बढ़ते प्रभाव का नतीजा है। चीन की नीति को देखते हुए भारत को वन चाइना पॉलिसी को भी ठंडे बस्ते में डाल देना चाहिए। भारत ने 20वें आसियान शिखर सम्मेलन में 12 सूत्री प्रस्ताव पेश किया, जिसमें समुद्री सहयोग एवं खाद्य सुरक्षा भी शामिल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार आसियान देशों के साथ सामरिक एवं व्यापारिक रिश्ते को मजबूत कर रहे हैं ताकि चीन अपने ही क्षेत्र में उलझ कर रह जाए। अमरीका चीन को घेरने की पहल में भारत का पूरा समर्थन कर रहा है।