बिलासपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि अन्तरिक्ष और परमाणु विज्ञान आदि क्षेत्रों में भारत को कभी-कभी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर असहयोग का सामना करना पड़ा लेकिन तमाम चुनौतियों के बावजूद हमारे कर्मठ वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों ने भारत की साख मजबूत की है। बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बात कही। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत ने चंद्रयान 3 अभियान को सफलता-पूर्वक सम्पन्न किया और सभी देशवासियों में उत्साह की लहर दौड़ गई।

उस सफलता के पीछे वर्षों के परिश्रम से अर्जित योग्यता तथा लक्ष्य के प्रति निष्ठा तो थी ही, मार्ग में आने वाली रुकावटों और असफलताओं से हतोत्साहित हुए बिना आगे बढ़ते रहने की भावना भी थी।Ó उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत जीवन में आगे बढऩे का भी यही मूल मंत्र है- निरंतर परिश्रम से अर्जित दक्षता, लक्ष्य के प्रति निष्ठा तथा तात्कालिक चुनौती या असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ते रहने का जज्बा। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पृष्ठभूमि का उदाहरण देकर मैं व्यक्तिगत जीवन में उसकी सार्थकता को रेखांकित करना चाहूंगी।

आज भारत अपने वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों के अथक परिश्रम तथा प्रतिभा के बल पर विश्व के परमाणु क्लब तथा अंतरिक्ष क्लब का सम्मानित सदस्य है।' उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में जो भी अंतर्राष्ट्रीय निर्णय लिए जाएंगे उसमें भारत की भूमिका रहेगी। अंतरिक्ष और परमाणु विज्ञान के क्षेत्रों में भारत को कभी-कभी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर असहयोग का सामना भी करना पड़ा, लेकिन तमाम चुनौतियों के बावजूद हमारे कर्मठ वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों ने भारत की साख मजबूत की है।

दीक्षांत समारोह में सत्र 2021-22 की विभिन्न परीक्षाओं के स्नातक, स्नातकोत्तर आदि में उत्तीर्ण दो हजार नौ सौ 46 छात्र, छात्राओं को उपाधि दी गई। राष्ट्रपति ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों तथा उनके माता पिता को बधाई देते हुए विद्यार्थियों की सफलता में योगदान देने के लिए प्राध्यापकों तथा विश्वविद्यालय टीम के सदस्यों की सराहना की।