विपक्षी पाॢटयां अगले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को मात देने के लिए एकजुट हो रही है, तो दूसरी तरफ सरकार समय से पहले लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 18 से 22 सितंबर के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने का आह्वान किया है। इस सत्र के दौरान पांच बैठकें होंगी जिसमें सार्थक चर्चा के साथ-साथ महत्वपूर्ण विधेयक पारित किये जाएंगे। विशेष सत्र बुलाने की केंद्र की पहल के बाद ही समय से पूर्व लोकसभा चुनाव कराने की खबर तेज हो गई है। हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को अपनी पार्टी की बैठक के दौरान कहा था कि नरेन्द्र मोदी सरकार दिसंबर में लोकसभा का चुनाव करवा सकती है। भाजपा ने सभी हेलिकॉप्टर बुक कर लिये हैं जिससे चुनाव प्रचार करने में सुविधा हो।

ममता के बयान के दूसरे दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी आशंका जाहिर की है कि केंद्र सरकार समय से पूर्व यानी जनवरी-फरवरी में चुनाव करवा सकती है। भाजपा ने इसके लिए भीतर ही भीतर पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के विभिन्न भागों के भाजपा एवं अपने सहयोगी दलों के सांसदों के साथ की गई बैठक तथा आवश्यक दिशा-निर्देश को इसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा की सभी राज्य इकाइयों ने भी अपनी-अपनी लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। विपक्षी दलों द्वारा भाजपा के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने तथा कॉमन उम्मीदवार खड़ा करने की रणनीति ने भाजपा को चौकन्ना कर दिया है। भाजपा हाई कमान ने इस बात पर सियासी मंथन शुरू कर दिया है कि अगर लोकसभा के साथ चार राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना एवं छत्तीसगढ़ के चुनाव हुए तो भाजपा को कितना फायदा या नुकसान हो सकता है।

मिजोरम में भी इसी वर्ष चुनाव होने वाले हैं। भाजपा चंद्रयान-3 की चमक तथा जी-20 की धमक को दिखाकर जल्द लोकसभा चुनाव करवाना चाहती है। जी-20 की देश के विभिन्न भागों में हुई कई बैठकें मोदी सरकार की चुनावी रणनीति का हिस्सा है। आगामी 9 एवं 10 सितंबर को जी-20 के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों की बैठक हो रही है। उस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी नेतृत्व क्षमता से सबको लोहा मनवाने के लिए पूरी तैयारी में हैं। घरेलू गैस की कीमतों में अचानक प्रति सिलेंडर 200 रुपए की कमी को चुनावी तोहफा के रूप में ही देखा जा रहा है। जनवरी में अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन होने जा रहा है। भाजपा इस मंदिर के लिए पूरा श्रेय लेने की तैयारी में है। भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में वर्षों से राम मंदिर का मुद्दा शामिल रहा है। तीन तलाक को खत्म करने के मुद्दे को भी भाजपा प्रमुखता देती रही है।

मोदी सरकार ने तीन तलाक को खत्म कर मुस्लिम महिलाओं को अपनी तरफ खींचने का पूरा प्रयास किया है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 एवं 35 हटाने का पूरा श्रेय पहले से ही भाजपा के खाते में चला गया है। दूसरी तरफ विपक्षी पाॢटयां बेरोजगारी, महंगाई, जातीय जनगणना तथा सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाने में जुटी हुई है। विपक्ष के सामने सबसे बड़ी समस्या सीटों के बंटवारे को लेकर है। प्रधानमंत्री पद के चेहरा को लेकर भी विभिन्न पाॢटयों का नजरिया अलग-अलग है। लेकिन कांग्रेस राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के लिए पूरा जोर लगा रही है। कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कांग्रेस से ही होना चाहिए क्योंकि विपक्षी कुनबे में कांग्रेस ही सबसे बड़ी पार्टी है। भाजपा विपक्ष को संभलने का मौका नहीं देना चाहती है। भाजपा नेताओं का विचार है कि जब तक विपक्षी पाॢटयां अपने को मजबूत करेगी तब तक चुनाव करा लिया जाए। आने वाले कुछ दिनों में नरेन्द्र मोदी सरकार और कुछ लोकलुभावन घोषणाएं कर सकती हैं जिससे जनता का विश्वास वर्तमान सरकार में बना रहे।