पर्यावरण संरक्षण को लेकर हर कोई व्यक्ति पौधारोपण करता है। पौधों को बचाने का संकल्प भी लेता है। मगर जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। अलवर शहर की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने पर्यावरण दिवस के अवसर पर ना केवल पौधारोपण किया। बल्कि इनकी देखभाल करने का पूरा जिम्मा भी उठाया है। इस से एक संदेश भी दिया कि पर्यावरण को बचाओ यही हमारा जीवन है। अलवर की स्पेक्ट्रा संस्था द्वारा करीब 45 गांवों में 662 पौधरोपण कर आमजन में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाई गई। मुखियाखेड़ा की दुर्गा स्वयं सहयता समूह की अध्यक्ष राधा ने बताया कि अगर हम पौधरोपण नहीं करेंगे और पेड़ पौधों की रक्षा नहीं करेंगे तो आने वाले समय में बहुत दिक्त हमें ही होगी।
इसी लिए हम सभी महिलाओं और बच्चों, युवा, गांव के सरपंच ने मिलकर शपथ ग्रहण की छोटे छोटे कदम उठाकर पर्यावरण में बदलाव लाएंगे। पेड़ पौधों को सार्वजानिक जगहों पर, खेतो के मेड पर, आदि स्थानों पर लगा कर पर्यावरण को और सुन्दर बना सकते हैं। दूसरी तरफ स्पैक्ट्रा संस्था और लेट ड्रीम फाउंडेशन के राज्य कॉर्डिनेटर दीपक असिस्ट ने बताया कि अगर लोग पर्यावरण का इसी तरह नाश करते रहेंगे तो आने वाले समय में स्थितियां और गंभीर हो जाएंगी। सांस लेने के लिए ना ऑक्सीजन रहेगी और हमें जीने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। ग्लोबल वार्मिंग और एसिड रेन का बढ़ता असर इस धरती पर हर जीवन को खत्म कर देगा। हमें ज्यादा से ज्यादा लोगो को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना होगा। प्लास्टिक का अधिक प्रयोग करने की बजाय बायोडिग्रेडेबल उत्पाद चुने। सिर्फ पौधारोपण करने से काम नहीं चलने वाला है। बुजुर्ग व्यक्ति छोटे बच्चे और युवाओं को पौधारोपण करने के साथ उन पौधों की देखभाल और पेड़ों को कटने से बचाना होगा।