पूरी दुनिया और हमारे देश में भी ढ़ेर सारे एनजीओ हैं, जो समाज और पर्यावरण की बेहतरी के लिए काम कर रही है और हर साल कुछ नए एनजीओ अस्तित्व में आते ही रहते हैं। ऐसा ही एक एनजीओ है टियर्स ऑफ द अर्थ ऑर्गनाइजेशन, जो पर्यावरण के साथ ही सामाजिक मुद्दों पर भी काम करती हैं। चलिए जानते हैं इसके बनने की कहानी।
कैसे हुई शुरुआत? 2010 में पांच लोगों के छोटे-मोटे सामाजिक कार्यों जैसे पेड़ लगाना, कचरा बीनना, रिसाइकलिंग आदि के साथ शुरुआत की। संस्था को 2015 में कॉपीराइट मिला और 2019 में यह इंडियन ट्रस्ट एक्ट 1882 के तहत रजिस्टर्ड हुई। 2015 में इस संस्था ने साउथ एशिया यूथ एनवायरमेंट कॉनक्लेव में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और तब से ही इसे ‘टियर्स ऑफ द अर्थ ऑर्गनाइजेशन’ के नाम से जाना जाता है। संस्था सामाजिक कल्याण और पर्यावरण के लिए काम करती है।
टीम बनाने का विचार कैसे आया? इसके संस्थापक रूमित वालिया नेखास बातचीत में बताया कि बचपन से ही हमने लोगों की पर्यावरण के प्रति विचारधारा बदलते देखी है जिसे देखकर दुख होता है। इसलिए पर्यावरण को बचाने के लिए हमने समान विचारधारा वाले कुछ लोगों की टीम बनाई। सालभर के अंदर ही टीम बड़ी हो गई और हम अपना काम बेहतर तरीके से करने लगें।
भविष्य की योजनाः उन्होंने बताया कि हम शिक्षा और जागरुकता के साथ ही जमीनी स्तर से जुड़े काम जैसे पेड़ लगाना और स्वच्छता की दिशा में अधिक काम करने की योजना बना रहे हैं। समाज के संपूर्ण विकास के लिए हम अपनी चार पहलों करेंगेः सेवियर्स, सिंग टू सेव, टीईएआई और अर्थिंग काउंसिल का विकास करेंगे।
पुरस्कार और उपलब्धिः 3 अंतरराष्ट्रीय, 11 राष्ट्रीय और 16 स्थानीय संस्था से जुड़ी है। यूनेस्को के क्रिएटिव सिटी प्रोग्राम के लिए मध्यप्रदेश सरकार के साथ और स्वच्छता अभियान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के साथ सहयोग। 8 देशों में अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम किया। ग्रीन अर्थ पैट्रोन फाउंडेशन की ओर से 2017 में सोशल अचीवर अवॉर्ड। नेशनल यूथ प्रोजक्ट की ओर से 2018 में नेशनल इंटेग्रेशन यूथ अवॉर्ड।
टीयर्स ऑफ द अर्थ ऑर्गनाइजेशन की ओर से की गई कुछ पहलः 1- दिल्ली के कुछ बाज़ारों में जाकर पॉलीथिन बैग इस्तेमाल करने वालों को कपड़े के बैग बांटे। 2- किस तरह से जाने-अनजाने हम पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं इस बारे में जागरुकता फैलाया। 3- क्लीन अप ड्राईव 2019 में शुरु की जिसके तहत पब्लिक प्लेस पर बिखरा कचरा साफ किया जाता है। 4- स्कूल कैंप पहल के जरिए स्कूली बच्चों को पर्यावरण बचाने के प्रति जागरुक किया जाता है। 5- मौसम में हो रहे बदलाव के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हाल ही में दिल्ली में क्लाइमेट स्ट्राइक पहल की शुरुआत की।