दक्षिण अफ्रीका की राजधानी जोहांसबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने तथा ब्रिक्स पार्टनरशिप मॉडल विकसित करने का निर्णय लिया गया। भविष्य में ब्रिक्स के लिए लागू किये जाने वाले कार्यक्रम पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सदस्य देशों ने आम सहमति से ब्रिक्स का विस्तार करने तथा चुनौतियों के अनुरूप आधुनिक बनाने का निर्णय लिया। अर्जेंटीना, ईरान, मिस्र, इथोपिया, सऊदी अरब एवं संयुक्त अरब अमीरात को ब्रिक्स में शामिल करने को हरी झंडी मिल गई है। जनवरी 2024 से इन नए छह देशों का कार्यकाल शुरू होगा। इसके साथ ही ब्रिक्स के सदस्य देशों की कुल संख्या 11 हो गई है। भारत, रूस, चीन, ब्राजील एवं दक्षिण अफ्रीका पहले से ही इसके सदस्य हैं।
23 अगस्त को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के चंद्रयान-3 की सफलता की धूम रही। ब्रिक्स के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस महत्वपूर्ण सफलता के लिए बधाई दी। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार एवं निवेश के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। बैठक के दौरान अंतरिक्ष अनुसंधान, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट एवं टेक्नोलॉजी के उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। मालूम हो कि चीन अफ्रीकी देशों में 200 मिलियन डॉलर निवेश कर मजबूत नेटवर्क बना चुका है। ढांचागत संरचना जैसे सड़क, पुल, बंदरगाह आदि में निवेश कर चीन अफ्रीकी देशों को अपना उपनिवेश बनाने की कोशिश में है। चीन भारी निवेश कर कमजोर देशों की अर्थ-व्यवस्था पर कब्जा कर लेता है तथा वहां की राजनीति पर पकड़ बना लेता है।
अफ्रीकी देश प्राकृृतिक संसाधनों से भरे पड़े हैं। इसी लालच से चीन गरीब देशों को अपने कर्जजाल में फंसाकर उसका दोहन करता है। श्रीलंका का हंबनटोटा तथा पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह इसका जीता-जागता उदाहरण है। अब भारत ने रूस और दक्षिण अफ्रीका के सहयोग से अफ्रीकी देशों में निवेश के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। श्रीलंका और पाकिस्तान की स्थिति को देखकर अफ्रीकी देश भी अब चीन से किनारा करने लगे हैं। रूस पहले से ही अफ्रीकी देशों में निवेश किया हुआ है। दक्षिण अफ्रीका में हुए ब्रिक्स सम्मेलन ने भारत को अफ्रीकी देशों में निवेश करने का मजबूत आधार दे दिया है। दक्षिण अफ्रीका भी भारत के इस प्रयास में कंधा से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने को तैयार है।