पटना : उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सवाल किया है कि भाजपा की केंद्र सरकार बिहार के जाति आधारित सर्वे से इतनी घबराई हुई क्यों है? अब तो ये लोग खुलकर कोर्ट में वैज्ञानिक तरीके से जुटाए जा रहे हैं। विश्वसनीय जाति आधारित सर्वे का विरोध कर रहे हैं? तेजस्वी ने आगे सवाल किया है कि क्या जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन व गरीबी को हटाकर वंचित/ उपेक्षित/ जरूरतमंद वर्गों का समावेशी विकास बीजेपी की संवैधानिक प्राथमिकता नहीं है?
तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर ये बातें कही हैं। तेजस्वी ने कहा है कि केन्द्र सरकार सभी जाति-वर्गों के साइंटिफिक और एक्यूरेट सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों की उपलब्धता से इसलिए डरी हुई है। क्योंकि पूंजीपतियों की बजाय इससे सभी वर्गों के गरीबों और वंचितों के कल्याणार्थ व हितार्थ सटीक विकास नीतियों और कार्यक्रमों को आकार दिया जा सकेगा। क्या केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार के जाति आधारित सर्वे का विरोध कथित नकली ओबीसी पीएम के कहने से कर रही है? तेजस्वी की ओर से सोशल मीडिया पर यह लिखे जाने के बाद जाति गणना के समर्थक और विरोधी दोनों भिड़ गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में बिहार के जाति आधारित सर्वे पर भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी केंद्र की ओर से अपना पक्ष रखा है। उन्होंने सर्वे की वैधानिकता के मामले पर शपथ पत्र दायर करने की अनुमति मांगी है। इसके बाद तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर आई है। तेजस्वी यादव के ट्वीट पर बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा है कि बिहार में जाति सर्वे भारतीय जनता पार्टी की सहमति के कारण ही संभव हो पाया है।