भारत ने अपने चंद्रयान-3 को आज शाम 6.04 मिनट पर चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर सॉफ्ट लैंङ्क्षडग करा कर इतिहास रच दिया है। भारत अब दुनिया का पहला देश है जिसने अपने चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंङ्क्षडग कराने में सफलता प्राप्त की है। हमारे देश के वैज्ञानिकों की यह सफलता 140 करोड़ देशवासियों के लिए गौरव की बात है। दुनिया की नजर चंद्रयान-3 के सॉफ्ट लैंङ्क्षडग पर लगी हुई थी। जैसे ही चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल (एलएम) चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा वैसे ही देशवासियों में खुशी की लहर फैल गई। लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) से युक्त लैंडर मॉड्यूल चंद्रमा पर खोज का काम करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैज्ञानिकों की इस सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा है कि यह सफलता विकसित भारत के बढ़ते कदम का प्रतीक है। मोदी ने कहा कि यह क्षण भारत के लिए खुशी का क्षण है। मालूम हो कि पिछले 14 जुलाई को श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केंद्र से अपराह्न 2.35 बजे चंद्रयान-3 को लांच किया गया था, जो 23 अगस्त को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा।

हालांकि भारत से पहले अमरीका, रूस तथा चीन चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव पर पहुंच चुका है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख एस सोमनाथ ने पिछले 6 जुलाई को चंद्रयान-3 भेजने की घोषणा की थी। चंद्रयान-3 मिशन को पूरा करने के लिए दिसंबर 2019 से ही तैयारी चल रही थी। इस मिशन के लिए इसरो ने सर्वप्रथम 75 करोड़ की मांग की थी। मिशन पूर्ण होने तक इस पर कुल लागत 615 करोड़ रुपए आई है जो किसी वॉलीवुड फिल्म के बजट से कम है। इसरो के वैज्ञानिकों ने इतने कम समय में जो सफलता हासिल की है वह प्रशंसा के योग्य है। इससे पहले भारत ने 20 जुलाई 2019 को चंद्रयान-2 लांच किया था, किंतु विक्रम लैंडर के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण मिशन पूरी तरह सफल नहीं हो सका। रूस ने पिछले 10 अगस्त को लूना-25 को लांच किया था जिसे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर 21 अगस्त को पहुंचना था।

इस पर 1659 करोड़ रुपए खर्च हुए थे, ङ्क्षकतु लूना-25 लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शक्तिशाली इंजन होने के कारण लूना-25 की रफ्तार चंद्रयान-3 से ज्यादा थी। चंद्रयान-3 प्रोजेक्ट पी. वीरमुथुवेल देख रहे हंै। वीर मुथुवेल तमिलनाडु के रहने वाले हैं। वर्तमान में वे चंद्र मिशन के परियोजना निदेशक के पद पर हैं। चंद्रयान-2 के लैंडर को चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंङ्क्षडग में विफल होने के कारण तत्कालीन निदेशक वनिता को स्थानांतरित कर दिया गया था।

चंद्रयान मिशन-3 में शामिल लैंडर और रोवर अगले 14 दिनों तक चंद्रमा की सतह पर रहकर डाटा एकत्रित करेगा। लैंङ्क्षडग के बाद रोवर लैंडर से अलग हो जाएगा। भारत के इस मिशन पर देश-विदेश की नजर लगी हुई थी। अमरीका, रूस तथा चीन के वैज्ञानिक चंद्रयान-3 के हर गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। खासकर लूना-25 के क्रैश होने के बाद लोगों के मन में संदेह होने लगा था। हमारे देश के वैज्ञानिकों ने अपनी कामयाबी का लोहा मनवा लिया। चंद्रयान-3 की सफलता से भारत को अंतरिक्ष में अपनी पकड़ मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। चंद्रयान-3 से मिलने वाली जानकारी के आधार पर भारत अपने अगले मिशन की तैयारी करेगा।