मणिपुर में मई के पहले सप्ताह में शुरू हुआ जातीय संघर्ष रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शांति स्थापित करने के लिए किये जा रहे प्रयासों के बावजूद बीच-बीच में हिंसात्मक घटनाएं हो रही हैं। हालांकि पहले की स्थिति में काफी सुधार हुआ है,  किंतु सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देश के विपक्षी दलों के निशाने पर मणिपुर है। सुप्रीम कोर्ट भी मणिपुर की घटनाओं को लेकर एक्शन में है। महिलाओं के साथ जिस तरह की शर्मनाक घटनाएं हुईं, वह अक्षम्य है। मणिपुर में जातीय  हिंसा के पीडि़तों के राहत एवं पुनर्वास कार्यों पर निगरानी के लिए अवकाशप्राप्त न्यायाधीश गीता मित्तल की अगुवाई में उच्च न्यायालय की तीन पूर्व महिला न्यायाधीशों की एक समिति गठित हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस समिति को मणिपुर में जातीय हिंसा के पीडि़तों को राहत एवं पुनर्वास कार्यों की निगरानी के लिए गठित किया था। समिति ने पहचान संबंधी दस्तावेजों को फिर से बनाये जाने और मुआवजा योजना में सुधार की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए उच्चतम न्यायालय में तीन रिपोर्ट सौंपी है।

न्यायालय इन रिपोर्टों पर गौर करने के बाद 25 अगस्त को कुछ प्रक्रियागत निर्देश जारी करेगा। इसके अलावा न्यायालय ने महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस प्रमुख दत्तात्रेय पडसालगिरकर को आपराधिक मामलों में जांच पर नजर रखने को कहा है। मणिपुर में शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि राज्य में लूटे गए करीब पांच हजार घातक हथियारों में से अभी तक केवल साढ़े बारह सौ हथियार ही बरामद किये गए हैं। इसका मतलब यह है कि अभी भी मणिपुर में लोगों के पास करीब चार हजार हथियार मौजूद हैं। थौवाई कुकी गांव में हुए हमले में ऐसे ही स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। जातीय हिंसा में अभी तक 160 से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं, जबकि 60 हजार से अधिक लोगों ने दूसरे स्थानों पर शरण ले रखी है।

मैतेई और कुकी संघर्ष में जबरन हैड हंटर यानी नगाओं की एंट्री कराने की कोशिश हो रही है। खुफिया जानकारी के अनुसार मणिपुर के नगा बहुल क्षेत्र के निकट ऐसी वारदात करने के प्रयास हुए हैं जिससे नगा समुदाय भी  हिंसा में कूद पड़े। कुकी और नगा समुदाय के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिश हो रही है। मणिपुर के तामेंगलौंग, चंदेल, उखरूल और सेनापति जिले को नगा जनजाति बहुल क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। वर्तमान परिवेश में नगा समुदाय के लोग भी अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। मणिपुर के नगा समुदाय के साथ केंद्र सरकार द्वारा शांति वार्ता जारी है। अगर केंद्र कुकी जनजाति के लोगों के लिए अलग से प्रशासनिक व्यवस्था लागू करता है तो नगा समुदाय में निश्चित रूप से असंतोष होगा। नगा समुदाय ने अपने प्रदर्शन के माध्यम से दिल्ली तक यह संदेश पहुंचा दिया है।

पिछले जून में भी नगा समुदाय के विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री से भेंट कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। केंद्र सरकार को इस बात पर ध्यान रखने की जरुरत है कि भारत के दो पड़ोसी देश म्यामां व चीन इस मामले को लेकर सक्रिय हो गए हैं। मणिपुर जातीय हिंसा का फायदा उठाकर दोनों पड़ोसी देशों ने उस क्षेत्र में सक्रिय आतंकियों को हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम देने के लिए हरसंभव सहायता दी है। एनएससीएन ने भी सरकार से कहा है कि अगर मणिपुर में हिंसा की चिंगारी नहीं थमी तो यह असम, मिजोरम सहित दूसरे राज्यों में फैल सकता है। नगालैंड के आतंकी संगठन मणिपुर सहित पूर्वोत्तर के कुछ अन्य राज्यों के भू-भाग को मिलाकर ग्रेटर नगालैंड बनाने की मांग रखी है। केंद्र सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि ग्रेटर नगालैंड के लिए किसी दूसरे राज्यों की भूमि को नगालैंड में शामिल करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। प्रधानमंत्री ने संसद में अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देने के दौरान कहा कि सरकार मणिपुर हिंसा मामले में हरसंभव कदम उठा रही है। मणिपुर की स्थिति को सूझबूझ से संभालने की जरुरत है।