भारत के चंद्रयान-3 मिशन के लॉन्च होने के बाद चंद्रमा की चर्चा चारों तरफ हो रही है। चंद्रयान-3 का दूसरा और फाइनल डीबूस्टिंग ऑपरेशन पूरा हो चुका है। इसके बाद अब विक्रम लैंडर की चंद्रमा से न्यूनतम दूरी 25 किमी और अधिकतम दूरी 134 किलोमीटर रह गई है। अब 23 अगस्त को सफल लैंडिंग का इंतजार है। आज हम आपको चंद्रमा की रोशनी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य के बारे में बताते हैं। क्या आपको पता है कि धरती पर चांद की रोशनी कैसे पहुंचती है और कितना समय लगता है? हम आपको ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब बताएंगे। अंधरे में चमकने वाले चांद की अपनी कोई रोशनी नहीं है। तो आखिर चांद कैसे चमकता है? विज्ञान के मुताबिक, सूर्य का प्रकाश चांद की सतह से टकराकर धरती पर पहुंचता है। इसकी वजह से रात में चंद्रमा चमकता है। चांद से कोई भी रोशनी धरती पर सीधे नहीं पहुंचती है।
सू्र्य का प्रकाश चंद्रमा से परावर्तित होकर धरती पर पहुंचता है। इसकी वजह से ही चांद अभी चमकदार दिखता है। अगर मान लिया जाए कि चांद की रोशनी ही धरती पर आती है, तो इसे पृथ्वी पर पहुंचने में कितना समय लगता है? धरती से चंद्रमा 3,84,400 किमी दूर है। प्रकाश की गति तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकेंड होती है। चांद की रोशनी धरती पर 1.3 सेकेंड में पहुंच जाती है। चांद और धरती के बीच की दूरी और प्रकाश की गति के आधार पर यह माना जाता है। धरती से सूर्य की दूरी 14.96 करोड़ किमी है। इसलिए सूर्य की रोशनी को धरती तक आने में 8 मिनट 16.6 सेकंड का समय लगता है। धरती पर चांद की किरणों की तीव्रता बेहद कम होती है, जिसकी वजह से किसी तरह का नुकसान हमें नहीं होता है। कई बार चांद के चारों तरफ इंद्रधनुष की तरह छल्ले दिखाई देते हैं।
इसे 'हेलो रिंग' कहते हैं जिससे हमें किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। कई बार चांद दिन में नजर आता है। आखिर यह खगोलीय घटना कैसे घटती है। चांद दिन में सूर्य का प्रकाश कम होने की वजह से नजर आता है। इसके बावजूद सूर्य के प्रकाश के परावर्तित होने की वजह से चांद दिन में दिखता है। चांद दिन में ज्यादातर सूरज के उदय और अस्त होने के समय दिखाई देता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, वायुमंडल में गैस के कुछ कण घूमते हैं। इन कणों में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की रोशनी होती है। इनसे छोटी तरंगें भी निकलती हैं, जो नीले और बैंगनी रंग की होती है। यह एक अलग दिशा में प्रकाश को अवशोषित और फिर से उत्सर्जित करती है। ऐसे में आसमान का रंग नीला हो जाता है। इससे सूर्य का प्रकाश कम हो जाता है और दिन में चांद दिखाई देता है।