श्रावण मास का विशेष पर्व है नागपंचमी, जो कि श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विधि-विधानपूर्वक मनाने की धाॢमक व पौराणिक परंपरा है। इस दिन भगवान् शिव के दरबार की पूजा-आराधना के साथ ही नागदेवता की भी पूजा-अर्चना श्रद्धा, आस्था और भक्तिभाव के साथ करने की धाॢमक मान्यता है। पंचमी तिथि के स्वामी नागदेवता माने गए हैं, नागलोक की देवी मां मनसा देवी हैं, फलस्वरूप इस तिथि के दिन नागदेवता के पूजन के साथ मां मनसा देवी की भी पूजा का विधान है। ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि इस वर्ष नागपंचमी का पावन पर्व सोमवार, 21 अगस्त को मनाया जाएगा। श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि रविवार, 20 अगस्त को अद्र्धरात्रि 12 बजकर 23 पर लगेगी जो कि सोमवार, 21 अगस्त को अद्र्धरात्रि के पश्ïचातï् 02 बजकर 01 मिनट तक रहेगी। रविवार, 20 अगस्त को चित्रा नक्षत्र रात्रिशेष 4 बजकर 22 मिनट पर लगेगा जो कि सोमवार, 21 अगस्त को रात्रिशेष 5 बजकर 37 मिनट तक रहेगी। इस दिन शुभयोग का अनुपम संयोग भी बन रहा है। शुभयोग रविवार, 20 अगस्त को रात्रि 9 बजकर 58 मिनट पर लगेगा जो कि सोमवार, 21 अगस्त को रात्रि 10 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।
गरुड़पुराण के अनुसार—नागपंचमी के दिन परिवार के सभी सदस्य नाग देवता की पूजा करते हैं। धाॢमक परंपरा के अनुसार मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर नाग देवता का चित्र चिपका कर या लाल चन्दन, काले रंग अथवा गोबर से नाग देवता बनाकर विधि-विधानपूर्वक दूध, लावा अॢपत करके धूप-दीप से पूजन करते हैं, जिससे नाग देवता प्रसन्न होते हैं, परिवार सर्पदंश से भयमुक्त रहता है। नागलोक की देवी मां मनसा देवी हैं। आज के दिन इनकी भी पूजा विशेष फलदाई मानी गई है। नि:सन्तान को सन्तान की प्राप्ति बतलाई गई है, इससे वंशवृद्धि भी होती है। नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने पर खुशहाली व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। ज्योतिॢवद् विमल जैन ने बताया कि श्रावण मास में नाग पंचमी के दिन कालसर्पयोग का निवारण विधि-विधानपूर्वक करके इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।
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