भारत-चीन सीमा के पूर्वी लद्दाख में वर्ष 2020 में हुए गतिरोध के बाद लगभग 3500 किलोमीटर लंबी सीमा पर भारत अपनी सामरिक क्षमता को बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहा है। पिछले तीन वर्षों से भारत और चीन दोनों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी हैं। कई दौर की वार्ता के बाद कुछ क्षेत्रों से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी हैं, किंतु डेमचौक एवं देपसांग क्षेत्र में अभी भी गतिरोध बना हुआ है। 14 अगस्त को भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच हुई मैराथन बैठक के बाद भी अभी तक कोई परिणाम सामने नहीं आया है। भारतीय पक्ष ने डेमचौक एवं देपसांग से अपनी सेना को पीछे ले जाने के लिए चीन पर दबाव डाला है। दक्षिण अफ्रीका में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच सीमा पर उपजे तनाव को खत्म करने के लिए वार्ता होनी है। ऐसी खबर है कि चीनी पक्ष समझौते का एक फार्मूला लेकर भारत के साथ बात करना चाहता है। दोनों राष्ट्र प्रमुखों के बीच इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा होने वाली है। चीन पर कभी भी विश्वास नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह पलटी मारने में माहिर है। चीन भारत के साथ संबंध सुधार कर अपना व्यापार बढ़ाना चाहता है, किंतु वह सीमा समस्या को उलझाये रखना चाहता है।
वर्तमान समय में चीनी सीमा पर लगभग 60 हजार सैनिक तैनात हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने 24 जुलाई को दक्षिण अफ्रीका की राजधानी जोहांसबर्ग में ब्रिक्स की बैठक के मौके पर शीर्ष चीनी राजनयिक वांग यी से मुलाकात की थी। पेंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद 5 मई 2020 से ही गतिरोध बना हुआ है। उसके बाद हिमाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में भी दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। भारत ने अपनी वायु सेना के जरिए लगभग 60 हजार सैनिकों को सीमा पर पहुंचाया। इस काम में पी-130-जे सुपर हरक्यूलिस और सी-17 ग्लोब मास्टर को लगाया गया था। थल सेना ने भी अपनी लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में आसानी से ले जाने योग्य एम-777 अल्ट्रा लाइट कोवित्जर तोप तैनात कर दी गई है। इसे आवश्यकता के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना संभव है। इसी तरह एम-777 को चिनूक हेक्किॉप्टर में भी आसानी से ले जाया जा सकता है।
भारत ने अमरीका निर्मित वाहनों, इजरायल से मंगाये गए 7.62 एमएम नेगेव लाइट मशीन गन एवं अन्य घातक हथियारों से सीमा को लैस किया है। इसके साथ ही भारत चीन के पड़ोसी देशों के साथ संबंध बढ़ाकर ड्रैगन को घेरने में लगा है। हाल ही में हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर ताइवान की राजधानी ताइपे में भारत के तीनों अंगों की सेनाओं के पूर्व प्रमुखों की उपस्थिति ने चीन की चिंता बढ़ा दी है। थल सेना के पूर्व प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे, नौसेना के पूर्व प्रमुख करमवीर सिंह तथा वायु सेना के पूर्व प्रमुख आरकेएस भदौरिया की ताइवान में उपस्थिति ने ड्रैगन की चिंता बढ़ा दी है। भारत ने चीन के पड़ोसी देश वियतनाम को युद्धपोत आईएनएस कृृपाण गिफ्ट में दिया है। इसी तरह फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति के लिए समझौता किया है। इससे वियतनाम एवं फिलीपींस के साथ संबंध और मजबूत होंगे तथा सामरिक सहयोग बढ़ेगा। भारत इजरायल से हेरॉन मार्क-2 चार ड्रोन ले रहा है, जिसे पाकिस्तान और चीन सीमा पर तैनात किया जाएगा। यह ड्रोन सीमा पर हो रही गतिविधियों की जानकारी देगा तथा चीन की गुप्तचरी करेगा। यह ड्रोन एंटी टैंक मिसाइल से लैस है जो लगातार 36 घंटे तक उड़ान भर सकता है एवं 35 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसके अलावा क्वाड देशों के सहयोग से भी चीन को घेरने की पहल हो रही है। कुल मिलाकर भारत पूरी तैयारी में है ताकि जरुरत पड़ने पर चीन को करारा जवाब दिया जा सके।