सनातन धर्म में व्रत त्यौहार की परंपरा काफी पुरातन है। हिन्दू धर्मग्रंथों में हर माह के विशिष्ट तिथि की विशेष महत्ता है। सभी तिथियों का किसी न किसी देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना से संबंध है। पुराणों के अनुसार कमला एकादशी का व्रत करने से भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा से सर्वमनोकामना पूर्ण होती है। अधिक मास या अतिरिक्त महीने में पड़ने वाली एकादशी व्रत को कमला एकादशी, पद्मिनी या पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, इस बार यह व्रत 12 अगस्त, शनिवार को है। इसे पुरूषोत्तम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस बार द्वितीय (अधिक) श्रावण कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि 10 अगस्त, गुरुवार को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 5 बजकर 07 मिनट पर लगेगी जो कि 12 अगस्त, शनिवार को प्रातः 6 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। इस दिन मृगशिरा नक्षत्र 11 अगस्त, शुक्रवार को रात्रिशेष 5 बजकर 32 मिनट पर लगेगा जो कि 12 अगस्त, शनिवार को प्रातः 6 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। जिसके फलस्वरूप 12 अगस्त, शनिवार को यह व्रत रखा जाएगा। एकादशी तिथि के व्रत का पारण द्वादशी तिथि में ही करना चाहिए। एकादशी तिथि के दिन निराहार रहते हुए गाय को गुड़ और हरी घास खिलाने तथा पशु-पक्षियों को दाना पानी देने और प्यासे लोगों को पानी पिलाने से पुण्इलल प्राप्त होता है।
ऐसे रखें व्रत : ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि सूर्योदय के समय ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर गंगा-स्नानादि करना चाहिए। गंगा-स्नान यदि संभव न हो तो घर पर ही स्वच्छ जल से स्नान करने के पश्चात् स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। प्रथम पूज्य श्रीगणेश जी को स्मरण करके आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना के पश्चात् कामला एकादशी के व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए। संपूर्ण दिन व्रत उपवास रखना चाहिए। जल आदि कुछ भी ग्रहण करना वर्जित है। विशेष परिस्थितियों में जल, दूध या फलाहार ग्रहण किया जा सकता है। मान्यता के अनुसार चावल तथा अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए।
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