चंद्रमा से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिक जानने को कोशिश कर रहे हैं। अभी तक चंद्रमा के बारे में कई हैरान कर देने वाली जानकारियां सामने आई हैं। दावा किया जाता है कि चंद्रमा की मिट्टी में कई तरह के खनिज हैं। इसकी वजह से दुनिया की कई एजेंसियों की इस ग्रह पर नजर है। चांद की सतह पर पानी होने के भी सुबूत मिल चुके हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि चांद पर जीवन के सबूत भी मिल सकते हैं। हालांकि इसकी राह में एक सबसे बड़ा रोड़ा है।
वजह यह है कि चांद पर एक दूसरे की आवाज को नहीं सुना जा सकता है। इसके पीछे की वैज्ञानिक वजह क्या है? यह आज हम आपको बताते हैं। धरती पर हम बोलकर एक दूसरे से कुछ कहते हैं। सामने वाला हमारी आवाज सुनकर उसी आधार पर जवाब देता है। अगर कोई नहीं बोल पाता है, तो उसकी बातों को समझ पाना बेहद मुश्किल होता है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या वजह है कि चंद्रमा एक दूसरे की आवाज क्यों नहीं सुनाई देती है? दरअसल किसी भी ध्वनि यानी आवाज को एक दूसरे तक पहुंचने के लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है। आप इस तरह समझ लीजिए कि अगर बिजली का तार कहीं पर कटा है, तो बिजली दूसरे स्थान पर नहीं पहुंच सकती है। ठीक इसी तरह ध्वनि को भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है। वह माध्यम ठोस, द्रव या गैस कोई भी हो सकता है। धरती पर आवाज को गैस एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने का काम करती है और जहां पर गैसें नहीं होती हैं, वहां किसी तरह की आवाज को नहीं सुना जा सकता है। चांद पर भी यही स्थिति है।
चंद्रमा पर नहीं है वायुमंडल : वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद पर वायुमंडल मौजूद नहीं है। इसकी वजह से वहां पर किसी तरह की कोई गैस उपलब्ध नहीं है। चूंकि वायु आवाज को एक दूसरे स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाती है। चंद्रमा पर वायु नहीं होने से ध्वनि एक दूसरे तक नहीं पहुंच पाती है। इसकी वजह से ही चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री एक दूसरे की आवाज नहीं सुन सकते हैं। ध्वनि एक ऊर्जा का रूप है जो तरंगों के रूप में होती है। तरंगे हमारे कान में कंपन पैदा करती हैं, जिससे सुनाई देता है। वैज्ञानिक चंद्रमा पर रेडियो तरंगों के माध्यम से सुनते हैं।